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मीडिया स्वामित्व पर गोलमेज चर्चा : सीयूके के डीसीजे ने रखी महत्वपूर्ण बातें

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गांदरबल। केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर (सीयू कश्मीर) के संचार एवं पत्रकारिता विभाग (डीसीजे) ने तुलमुला परिसर में गुरुवार को मीडिया स्वामित्व पर एक गोलमेज चर्चा का आयोजन किया। इस चर्चा में मीडिया के बढ़ते एकाधिकार और उसके लोकतंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. अहसनुल हक चिश्ती जो अतिरिक्त सचिव (सरकार) और वुलर-मनासबल विकास प्राधिकरण (डब्ल्यूएमडीए) के सीईओ हैं, ने मीडिया एकीकरण के वैश्विक रुझानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में 20 सबसे बड़ी समाचार पत्र कंपनियां कुल पाठकों के आधे से अधिक को नियंत्रित करती हैं। डॉ. चिश्ती ने बड़े मीडिया मोगल्स और कांग्लोमरेट्स के प्रसारण एवं मुद्रण माध्यमों के माध्यम से विस्तार का जिक्र करते हुए कहा कि स्वामित्व का संकेंद्रण राजनीतिक एवं सार्वजनिक विमर्श को आकार दे सकता है।
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उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, मीडिया क्षेत्र में हमारे देश में तेजी से विस्तार हुआ है, लेकिन स्वामित्व कुछ व्यक्तियों या निगमों के हाथों में अधिक केंद्रित हो गया है। कुछ हाथों में मीडिया स्वामित्व का संकेंद्रण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विचारों की विविधता के लिए संभावित खतरा पैदा करता है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी स्थिति में मालिक अपनी हितों की रक्षा के लिए संपादकीय नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं और एकतरफा कथानक बना सकते हैं। अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. शाहिद रसूल, डीन एकेडमिक अफेयर्स एवं स्कूल ऑफ मीडिया स्टडीज के डीन ने मीडिया को लोकतंत्र के चार स्तंभों में से एक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया स्वतंत्र रूप से कार्य करें। उन्होंने टिप्पणी की कि स्वामित्व का संकेंद्रण अक्सर सामग्री की एकरूपता (होमोजेनाइजेशन) की ओर ले जाता है, क्योंकि कई प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करने वाली कंपनियां अधिक पहुंच के लिए समान सामग्री को बढ़ावा देती हैं, जिससे दृष्टिकोणों की विविधता और वैकल्पिक कथानकों में कमी आती है।
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