- बिहार विधानसभा समिति ने कहा, कश्मीर में अमन और भाईचारे का माहौल, सरकारी स्कूलों का शिक्षा स्तर सराहनीय
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। बिहार विधानसभा की अल्पसंख्यक कल्याण समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर का पांच दिवसीय अध्ययन दौरा वीरवार को पूरा किया। इस दौरान समिति के सदस्यों ने यहां के स्थानीय नागरिकों, प्रवासी मजदूरों और कई वरिष्ठ राजनेताओं से मुलाकात की। दौरे के समापन पर पत्रकारों से बात करते हुए समिति के अध्यक्ष अख्तरुल इस्लाम और अन्य सदस्यों तौसीफ आलम, सरवर आलम, गुलाम सरवर, मुर्शिद आलम, मनोज विश्वास और एडवोकेट आदिल हसन ने कश्मीर के शांतिपूर्ण माहौल, यहां के लोगों के व्यवहार और शिक्षा व्यवस्था की जमकर तारीफ की।
समिति के अध्यक्ष ने कहा कि कश्मीर आने से पहले दिल में एक अनजाना सा डर था, लेकिन यहां पांच दिन बिताने के बाद वह धारणा पूरी तरह बदल गई है। कश्मीर का नाम सुनकर बाहर के लोगों में जो डर या संशय रहता है, वह यहां आकर पूरी तरह दूर हो गया। हमने यहां हर तरफ अमन-ओ-अमान देखा। समिति के सदस्य मनोज विश्वास ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बाहर जम्मू-कश्मीर को लेकर जो भ्रम फैलाया जाता है, वह हकीकत से बिल्कुल अलग है। यहां के लोग बेहद ईमानदार और मिलनसार हैं। उन्होंने देशभर के लोगों से अपील की कि वे कश्मीर आएं और यहाँ के शांत वातावरण का आनंद लें।
दौरे के दौरान समिति ने बिहार से आए अल्पसंख्यक और दलित समुदाय के प्रवासी मदूरों से भी मुलाकात की। सदस्यों ने बताया कि देश के अन्य राज्यों पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र की तुलना में कश्मीर में रह रहे मजदूरों ने खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस किया है। मज़दूरों का कहना था कि यहां उन्हें सम्मान और सुरक्षा दोनों मिलती है और स्थानीय लोगों का रवैया उनके प्रति काफी सहानुभूतिपूर्ण है।
अध्यक्ष ने कश्मीर की शिक्षा व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि यहां अन्य राज्यों के मुकाबले प्राइवेट स्कूलों का चलन कम है और सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर काफी संतोषजनक है, जो कि किसी भी राज्य के विकास के लिए एक बेहतरीन संकेत है। इसके अलावा, कश्मीर यूनिवर्सिटी के दौरे का ज़िक्र करते हुए उन्होंने खुशी जताई कि जहां बिहार में फारसी भाषा लगभग लुप्त होने की कगार पर है, वहीं कश्मीर यूनिवर्सिटी में इस भाषा की तालीम और तरक्की के लिए बेहतरीन काम किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने घाटी के लोगों की अच्छी सेहत और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी सकारात्मक टिप्पणी की।
वरिष्ठ नेताओं और स्पीकर से मुलाकात
अपने इस पांच दिवसीय दौरे के दौरान बिहार काउंसिल और झारखंड की एश्योरेंस कमिटी के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर, पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, सज्जाद लोन और मुफ्ती-ए-आजम नासिर दल इस्लाम जैसी प्रमुख शख्सियतों से मुलाकात की। फारूक अब्दुल्ला के साथ हुई लंबी राजनीतिक चर्चा का जिक्र करते हुए समिति के अध्यक्ष ने उनके संदेश को दोहराया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंसाफ (न्याय) सबसे जरूरी है और मिल-जुलकर रहने में ही सबकी भलाई है।
केंद्र सरकार से वादा निभाने की अपील
जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर बात करते हुए अध्यक्ष ने कहा कि हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है। केंद्र सरकार ने संसद के पटल पर जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा देने का जो वादा किया है, उसे निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हम सबकी जिम्मेदारी है और जब सरकार अपने वादे पूरे करती है, तभी जनता का व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है। अंत में समिति के सदस्यों ने कहा कि वे इस दौरे से बहुत कुछ सीखकर जा रहे हैं और यहां की जो भी कमियां या जरूरी बातें हैं, उन्हें बिहार विधानसभा के सामने रिपोर्ट के रूप में रखेंगे। समिति ने इस बेहतरीन अनुभव और स्वागत के लिए श्रीनगर और जम्मू-कश्मीर के प्रशासन व जनता का आभार व्यक्त किया।