- स्किम्स चिकित्सा अधीक्षक की बार-बार की अपीलों को श्रीनगर नगर निगम ने किया नजरअंदाज
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। प्रसिद्ध शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (स्किम्स) में इन दिनों मरीजों, उनके तीमारदारों और डॉक्टरों का जीना मुहाल हो गया है। गर्मियों का तापमान बढ़ने के साथ ही पास में स्थित अच्छन डंपिंग साइट से उठने वाली असहनीय बदबू ने बेहद भयंकर रूप ले लिया है। दोपहर और शाम के वक्त यह दुर्गंध इतनी तीव्र हो जाती है कि लोगों का उलटी आना और जी मिचलाना आम बात हो गई है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों ने प्रशासन की लापरवाही पर भारी नाराजगी जाहिर की है। दक्षिण कश्मीर से आए एक तीमारदार मोहम्मद हनीफ ने बताया कि उनके पिता यहां भर्ती हैं लेकिन दोपहर में उठने वाली तीव्र बदबू के कारण वार्डों में सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। एक अस्पताल में मरीजों को ठीक होने का माहौल मिलना चाहिए लेकिन यह बदबू उनके तनाव और बीमारी को और बढ़ा रही है।
मरीजों का कहना है कि इस भयंकर दुर्गंध के कारण उन्हें बेचैनी रहती है और भूख तक लगनी बंद हो गई है जिससे उनके ठीक होने की प्रक्रिया धीमी हो रही है। अस्पताल के कर्मचारियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि डॉक्टर, नर्स और आवासीय क्वार्टर में रहने वाले स्टाफ सालों से इस नारकीय स्थिति को झेल रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता एमएम शुजा की ओररेस सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत हासिल किए गए दस्तावेजों से इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आरटीआई के दस्तावेजों के अनुसार स्किम्स के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. फारूक अहमद जान ने श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) के कमिश्नर को बार-बार पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। पत्रों में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यह दुर्गंध न केवल भारी असुविधा पैदा कर रही है बल्कि अस्पताल में भर्ती गंभीर रूप से बीमार मरीजों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुकी है।
नगर निगम से स्थायी कदम उठाने की मांग
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि उन्हें तीमारदारों से लगातार अनगिनत शिकायतें मिल रही हैं। स्किम्स के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने श्रीनगर नगर निगम से डंपिंग साइट से आने वाली बदबू को कम करने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के वैज्ञानिक उपाय करने का बार-बार लिखित अनुरोध किया लेकिन अब तक नगर निगम द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अस्पताल प्रशासन ने सार्वजनिक हित में एक बार फिर नगर निगम से स्थायी कदम उठाने की मांग की है ताकि मरीजों के स्वास्थ्य और गरिमा की रक्षा की जा सके।