वांगचुक के अनुसार, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों तथा देश के युवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख प्रशासन ने करदाताओं के पैसों का इस्तेमाल करके लद्दाख लेंस और लद्दाख विजन जैसे निजी सोशल मीडिया हैंडल को वित्तीय मदद दी।
इनमें से लद्दाख लेंस का उपयोग उनकी छवि धूमिल करने के लिए किया गया, जबकि लद्दाख विजन के जरिए एलजी का महिमामंडन किया गया।इस खुलासे से पहले वांगचुक ने बताया कि देश की गरिमा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शुरुआत में इस सामग्री को सार्वजनिक नहीं किया था। उन्होंने सबसे पहले मामले की जानकारी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के प्रमुख के साथ साझा की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई न होने के बाद उन्हें यह मामला जनता के सामने लाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि सामरिक और पारिस्थितिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील इस सीमावर्ती क्षेत्र में प्रशासन के इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर तुरंत रोक लगाई जाए। हालांकि, ये सभी आरोप सोनम वांगचुक के बयानों पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।