माता-पिता की मृत्यु के बाद इलाज में आई परेशानी से प्रेरित होकर उठाया कदम
मुजम्मिल याकूब
शोपियां। लोगों के लिए मिसाल पेश करते हुए डॉ. सबीना कयूम और उनके भाई इंजीनियर शौकत कयूम खान ने श्रीनगर के स्किम्स बेमिना अस्पताल को चार पूरी तरह सुसज्जित हीमोडायलिसिस मशीनें दान की हैं। इससे सरकारी अस्पताल में गुर्दे (किडनी) की जरूरी देखभाल सेवाएं बेहतर हुई हैं। उन्हें यह प्रेरणा अपने माता-पिता से मिली।
डॉ. सबीना और इंजीनियर शौकत के अनुसार, उनके पिता गुर्दे के मरीज थे और उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुई थी। पिता के इलाज और डायलिसिस के दौरान परिवार पर पड़ने वाले वित्तीय और भावनात्मक बोझ को उन्होंने करीब से देखा। इसी दौरान उनके पिता ने गरीबों के लिए एक डायलिसिस केंद्र स्थापित करने का सपना देखा था। हालांकि दिल की समस्याओं के कारण सर्जरी के दौरान उनका निधन हो गया और उनका सपना अधूरा रह गया।
कुछ साल बाद उनकी मां की तबीयत भी खराब हुई और आखिरी दिनों में उन्हें स्किम्स बेमिना में भर्ती कराया गया। मां को डायलिसिस की जरूरत थी, जो उस समय अस्पताल में उपलब्ध नहीं थी। उन्हें दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ा। मृत्यु से पहले उनकी मां ने इच्छा जताई थी कि डायलिसिस सेवाओं की अनुपलब्धता के कारण किसी भी मरीज को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।
अपने माता-पिता से प्रेरित होकर उन्होंने एक निजी केंद्र खोलने के बजाय एक सरकारी अस्पताल को मशीनें दान करने का निर्णय लिया। इससे मरीजों, खासकर मध्यम और निम्न-आय वर्ग के लोगों को मुफ्त और सुलभ इलाज मिल सकेगा। स्किम्स बेमिना पूरे कश्मीर के मरीजों का इलाज करता है, इसलिए यहां मशीनें दान देने से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि ये चारों डायलिसिस मशीनें पूरी तरह परिवार की बचत से खरीदी गई हैं और इसमें कोई सरकारी फंडिंग शामिल नहीं है। भाई-बहन ने स्किम्स के निदेशक डॉ. अशरफ गनई, प्रिंसिपल डॉ. फैसल तथा डॉ. मुजफ्फर और डॉ. तारिक सहित वरिष्ठ फैकल्टी के सदस्यों के समर्थन और सहयोग के लिए आभार जताया।
डॉ. सबीना कयूम ने कहा कि यह कदम पहचान पाने के लिए नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी निभाने के लिए था। उन्होंने कश्मीर के युवाओं से आगे आकर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में योगदान देने की अपील की। संवाद