प्रसिद्ध शिया धर्मगुरु आगा सैयद बाकिर अल-मोसवी अल-नजफी का निधन हो गया, जिन्हें बडगाम में सुपुर्द-ए-खाक किया गया और उनकी अंतिम यात्रा में हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
जम्मू और कश्मीर प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान और शिया धार्मिक नेता आगा सैयद बाकिर अल-मोसवी अल-नजफी का निधन हो गया। उनके गृहनगर बडगाम में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौँरान उन्हें श्रद्धांजलि देने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, कई मंत्री और जम्मू-कश्मीर के हजारों लोग शामिल हुए। आगा सैयद बाकिर श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी के चाचा थे।
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आगा सैयद बाकिर अल-मोसवी एक बहुत सम्मानित शिया धर्मगुरु थे। वह अपने गहरे इस्लामी ज्ञान, तकरीर और एकता और शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए जाने जाते थे। उनकी तकरीर और बातों को लोग बहुत मानते थे। उन्होंने धार्मिक और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बडगाम में उनके पैतृक स्थान अस्थान-ए-आलिया में नमाज-ए-जनाजा अदा की गई। इसमें पूरे कश्मीर से विद्वान, राजनीतिक नेता और अन्य लोग शामिल हुए। उनकी शिक्षा और सामुदायिक कल्याण में उनके योगदान को याद करते हुए कई लोग काफी भावुक दिखे।
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यहां पहुंचे मुख्यमंत्री उमर उब्दुल्ला ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि यहां आए हजारों लोगों का हुजूम बता रहा है कि समाज में उनकी कितनी इज्जत थी। उनका जाना जम्मू-कश्मीर की नहीं पूरे मुस्लिम जगत की क्षति है। आगा सैयद अर्शिद अल मोसवी ने बताया कि आगा साहब ने सैकड़ों किताबें लिखी हैं। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी के अच्छे जानकार थे।
एमएलए खान साहिब सैफुद्दीन भट्ट ने बताया कि वह सुन्नी-शिया या कोई भी मसलक का मामला हो, वह दीन की रोशनी में उसकी जानकारी देते थे। श्रीनगर के खय्याम चौक निवासी मीर शौकत अली ने बताया कि आगा साहब कश्मीर के ही नहीं पूरे हिंदुस्तान के मुसलमानों के लिए खास थे। वह इल्म के समंदर थे।