मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सात साल बाद भी लोगों के जख्म नहीं भरे हैं और केंद्र सरकार द्वारा राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के अधिकारों और पहचान की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
फारूक अब्दुल्ला ने भी केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा निभाने की अपील की। वहीं पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन कर अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इल्तिजा ने पुलिस पर दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया।
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने अनुच्छेद 370 हटाने को जम्मू-कश्मीर के लोगों के खिलाफ कठोर राजनीतिक फैसला बताया, जबकि सीपीआई(एम) नेता एम.वाई. तारिगामी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया।
जम्मू में कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अलग-अलग रैलियां निकालकर 5 अगस्त को काला दिवस बताया और राज्य का दर्जा, भूमि व रोजगार संबंधी संवैधानिक अधिकार बहाल करने की मांग की। पुलिस ने दोनों दलों के मार्च को आगे बढ़ने से रोक दिया।
वहीं जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने विरोध प्रदर्शनों को महत्व नहीं देते हुए कहा कि 5 अगस्त 2019 ने भेदभावपूर्ण व्यवस्था का अंत किया और जम्मू-कश्मीर में सामाजिक न्याय तथा विकास का नया दौर शुरू हुआ। उन्होंने आतंकवाद पीड़ित परिवारों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे और कहा कि आतंक के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और रोजगार के क्षेत्रों में व्यापक बदलाव आए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे शांति, प्रगति और समान अवसरों की नई शुरुआत बताया, जबकि भाजपा ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने से जम्मू-कश्मीर देश की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ गया और विकास को नई गति मिली। दूसरी ओर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा अब तक बहाल न होने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार का जल्द का वादा आखिर कब पूरा होगा।
इस बीच, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओजेके) की स्थिति को लेकर भी चर्चाएं रहीं। कुछ रिपोर्टों में वहां इंटरनेट बंदी, विरोध प्रदर्शन और आर्थिक परेशानियों का जिक्र किया गया। जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, खेल, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में हुए विकास को प्रमुखता से रेखांकित किया गया।