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मुख्यधारा के नेताओं को राजनीति छोड़ने के लिए मजबूर कर रही सरकारः उमर

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श्रीनगर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते उमर अब्दुल्ला। - फोटो : SHRINAGAR
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श्रीनगर। पूर्व मुख्यमंत्री और नेकां उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर मुख्यधारा के नेताओं को राजनीति छोड़ने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सत्ता की लड़ाई नहीं है, मुख्यमंत्री की कुर्सी की लड़ाई नहीं है। लानत हो हम पर अगर इन हालात में भी आज सत्ता की कुर्सी के पीछे भागें। लोग कभी हमें माफ नहीं करेंगे। वीरवार को पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि आखिर वह हमसे चाहती क्या है। सरकार ने रणनीति के जरिये मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को कमजोर करने और विभाजित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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उमर ने कहा कि पिछले साल 5 अगस्त से अब तक केंद्र सरकार के लिए गए फैसलों ने जमीनी हालत को बदल दिया है। मुख्यधारा की पार्टियों को एक साथ हाथ मिलाने पर मजबूर किया। उमर ने कहा कि पिछले साल की शुरुआत में हम (मुख्यधारा की पार्टियां) चुनावों पर नजर गड़ाए हुए थे। एक-दूसरे का विरोध करने में व्यस्त थे। जैसे-जैसे हमारी आवाज कमजोर होती गई, सरकार अपनी योजनाओं में सफल होती गई और हमारी पहचान छीनती गई। हमने अब अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए हाथ मिला लिए हैं, लेकिन हमें देश विरोधी करार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के दलों के बीच यह गठजोड़ कुछ साल पहले होना चाहिए था और अगर तब ऐसा हुआ होता तो स्थिति अलग होती।
नया भूमि कानून यहां के लोगों को बाहर निकलने के लिए
भूमि कानून को निरस्त करने पर उमर ने कहा कि नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और देश के कई अन्य राज्यों में कोई भी जमीन नहीं खरीद सकता है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में अमीर तबके को खुली जमीन दी गई है ताकि वे यहां के लोगों को बाहर निकाल फेंकें। इस स्थिति के बीच वह हमसे चुपी की उम्मीद कर रहे हैं जो संभव नहीं है। यह लड़ाई आखिरी दम तक जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया और सरकार ने संविधान को ध्वस्त कर दिया। उमर ने यह भी कहा कि नागालैंड में नेताओं ने स्पष्ट रूप से भारतीय संविधान, ध्वज और संप्रभुता को अस्वीकार कर दिया है लेकिन इसके बावजूद भी उनके साथ बातचीत की जा रही है। जब जम्मू-कश्मीर में लोग अपनी पहचान, भूमि और अन्य अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं तो आप उन्हें देश विरोधी बता रहे हैं।
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