हिमस्खलन से सुरक्षा
सुरंग में कई क्रॉस गैलरी हैं, जो आग या अन्य आपदाओं के दौरान इस्तेमाल की जा सकती हैं. इन गैलरी का उपयोग मोटर गाड़ियों या पैदल चलने वालों के लिए किया जा सकता है. यह सुरंग पूरी तरह से हिमस्खलन से सुरक्षित बनाई गई है, जिससे यात्रियों को पूरे साल निर्बाध यात्रा का अनुभव मिलेगा. ज़ेड-मोड़ टनल का महत्व केवल आम नागरिकों और पर्यटकों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सैनिकों और देश की सुरक्षा के लिए भी अहम है।
लद्दाख और कारगिल होते हुए भारत की सीमाएं चीन और पाकिस्तान से मिलती हैं। यह सुरंग सैन्य बलों को तेजी से आवाजाही की सुविधा देकर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होगी.जेड-मोड़ सुरंग जम्मू-कश्मीर के गंदेरबल जिले में गगनगीर और सोनमर्ग को जोड़ती है।
यह सुरंग समुद्र तल से 2,637 मीटर (8,652 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। इसे 80 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से प्रति घंटे 1,000 वाहनों को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है। सुरंग का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड का उपयोग करके किया गया है. जेड मोड़ सुरंग एनएच 1 श्रीनगर-लेह राजमार्ग का हिस्सा है। इस परियोजना को 24 अरब रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी।
सुरंग एक वेंटिलेशन सिस्टम से लैस है और इसके दो पोर्टल हैं - पश्चिमी और पूर्वी. ज़ेड-मोड़ सुरंग 31 सुरंगों में से एक है। सुरंग बनने से पहले, यह रास्ता सर्दियों के महीनों के दौरान हिमस्खलन और असुरक्षित होने के लिए बदनाम था। अब 6.5 किलोमीटर की दूरी अब सिर्फ़ 15 मिनट में तय की जा सकती है, जबकि पहले टेढ़ी-मेढ़ी पहाड़ी सड़क पर चलने में घंटों लगते थे।