निर्माण करने वाली कंपनी के मुताबिक जेड मोड़ टनल की क्षमता 1100 वाहनों की है। इतने वाहनों के एक घंटे में आवागमन के बावजूद ट्रैफिक पर कोई दबाव नहीं बढ़ेगा।
टनल में आग से बचाव के इंतजाम
इसके लिए विश्वस्तरीय इंतजाम किए गए हैं। इसमें वाटर पंप के साथ ही धुआं निकालने के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं। एयर वेसेल समेत 16 पंप लगाए गए हैं। वहीं, 96 आपातकालीन निकास द्वार बनाए गए हैं, ताकि किसी भी दुर्घटना की स्थिति में लोग आसानी से निकल सकें।
6.5 किमी लंबे टनल में वेंटिलेशन के लिए भी हैं खास व्यवस्थाएंवेंटिलेशन के लिए अंदर और बाहर मिलाकर 52 जेट फैन लगाए गए हैं। 500 केवी क्षमता के 4 एग्जास्ट फैन भी इसमें लगे हैं। दो भारी क्षमता वाले एक्सियल फैन व चिमनी की भी इसमें सुविधा है। जरूरत पड़ने पर हवा के दबाव को कम करने के लिए भी व्यवस्थाएं की गई हैं।
अधिकतम भूकंप की तीव्रता झेल सकती है सुरंगगांदरबल इलाका सीस्मिक जोन-5 में है। यानी यहां अधिकतम तीव्रता के भूकंप आने का खतरा रहता है, जो रिक्टर स्केल पर 8 या इससे भी अधिक हो सकती है। निर्माणकर्ता कंपनी का दावा है कि टनल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अधिकतम तीव्रता वाले भूकंप में भी इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचे। यही नहीं इसको इस तरह बनाया गया है जिससे 100 साल तक इसकी मजबूती बरकरार रहे।
सेना के लिए भी मददगार
इस टनल से सेना के साजो-सामान के साथ ही टैंक भी आसानी से और कम समय में एक छोर से दूसरे छोर तक ले जाए सकेंगे। टैंकों के आवागमन से भी इसकी सड़क पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
49 महीने में बनकर तैयार हुआ जेड मोड़ टनल
2378.76 करोड़ रुपये खर्च हुए इसे बनाने में।
31 लाख 72 हजार 800 बोरी सीमेंट और 3465 मीट्रिक टन सरिया का इस्तेमाल हुआ है इसे बनाने में
1623 लोग काम करते थे प्रतिदिन टनल का काम तेजी पर आने पर 1 करोड़ 55 लाख 17 हजार 360 मानव कार्य घंटे लगे इसे तैयार करने में।