महबूबा ने कहा कि भारत लंबे समय से मानवाधिकार, लोकतंत्र और स्वतंत्र विदेश नीति का समर्थक रहा है। इसके बावजूद गाजा और पश्चिम एशिया में हुई घटनाओं को लेकर भारत की ओर से अपेक्षित मजबूती से आवाज नहीं उठाई गई। उन्होंने कहा, “हमें अध्यक्षता तो मिली, लेकिन हमारी आवाज बंद रही।
महबूबा ने ब्रिक्स के दिल्ली घोषणापत्र का स्वागत किया, जिसमें पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और पश्चिम एशिया की स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि भारत को इस घोषणा की पहल करते हुए सबसे आगे रहना चाहिए था।
पीडीपी अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति में बदलाव आया है और आतंकवादी हमलों की निंदा में भी चयनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जबकि भारत अभी भी महाशक्ति-केंद्रित सोच में फंसा हुआ है।