सूत्रों के अनुसार तीनों पाकिस्तानी आतंकवादी बताए जा रहे हैं और इनके नाम अबू हमजा उर्फ हारिस, जिबरान और सुलेमान बताए जा रहे हैं। ये लश्कर- ए-ताइबा के हैं। हालांकि, इसको लेकर सुरक्षाबलों की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है। उनके अनुसार शिनाख्त होने के बाद ही पुष्टि की जाएगी।
सैन्य सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि पहलगाम हमले के बाद से कम्युनिकेशन डिवाइस की जांच की जा रही थी। करीब दो सप्ताह पहले अचानक से इस डिवाइस पर संदिग्ध संचार का पता चला। इसके बाद तुरंत ही सेना ने अपनी यूनिट को सतर्क कर दिया।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए परवेज और बशीर अहमद नामक दो आतंकी सहयोगियों ने भी बताया था कि पहलगाम आतंकवादी हमले में तीन पाकिस्तानी लश्कर आतंकवादी शामिल थे।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजीपी वीके बिरदी ने कहा कि शवों को नीचे लाने में समय लगेगा जिसके बाद उनकी शिनाख्त हो पाएगी। सूत्रों के अनुसार मारे गए आतंकवादी की पहचान के लिए ये तस्वीरें गिरफ्तार आतंकवादियों को दिखाई जाएंगी।
दाचीगाम के ऊपरी क्षेत्र में हो रहा था इस्तेमालएजेंसियों का मानना है कि जिस कम्युनिकेशन डिवाइस के सिग्नल दोबारा से एक्टिवेट हुए हैं। यह डिवाइस पहलगाम हमले में आतंकियों द्वारा इस्तेमाल में लाई गई थी। इसके कॉर्डिनेट्स जांच के दौरान पाया गया कि आतंकी इस डिवाइस का इस्तेमाल दाचीगाम के ऊपरी क्षेत्र में कर रहे हैं।
इसके बाद से लगातार इस क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान शुरू किया गया। सूत्रों ने बताया कि रविवार देर रात लिदवास क्षेत्र में आतंकवादियों की मूवमेंट की सूचना मिली। इसके बाद 24 राष्ट्रीय राइफल्स (आरआर) और 4 पैरा स्पेशल फोर्सेज के जवानों ने ऑपरेशन को तेज किया। सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे तीन आतंकवादियों को मार गिराते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की।
करीब दो सप्ताह पहले इसी डिवाइस से की गई थी फोन कॉल
सूत्रों ने बताया कि बताया कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादियों द्वारा कथित तौर पर एक हुआवेई सेटेलाइट फोन का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन हमले के बाद से इस डिवाइस का इस्तेमाल नहीं किया गया था। हालांकि, डिवाइस पर नजर रखने वाली खुफिया एजेंसियों ने पाया कि करीब दो सप्ताह पहले इस उपकरण से एक कॉल की गई थी।
इसके बाद डिवाइस के कोऑर्डिनेट दाचीगाम के काफी ऊपरी इलाके में पाए गए, लेकिन इस बीच सूत्रों ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में और भी कुछ आतंकियों की मौजूदगी की खबरें हैं। अब यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि यह वही ग्रुप है जिसने डिवाइस का इस्तेमाल किया था। अगर डिवाइस बरामद होती है तो उसकी फॉरेंसिक के बाद ही पहलगाम हमले में इस्तेमाल हुई डिवाइस की पुष्टि हो पाएगी।
ऐसे चला ऑपरेशन महादेवरविवार रात दो बजे अल्ट्रा कम्युनिकेशन डिवाइस को एक्टिवेट किया
सोमवार सुबह 8 से 9:30 के बीच सेना ने 2 अलग अलग ड्रोन भेजकर उनकी सटीक लोकेशन पता लगा ली।10 बजे सुबह राष्ट्रीय राइफल की एंटी टेररिस्ट फोर्स महादेव पहाड़ी पर चढ़ गई।
11 बजे पहले ही राउंड में इतनी भारी फायरिंग की गई कि 2 आतंकी तत्काल मौके पर ढेर हो गए। उनके तीसरे साथी ने गोली लगने के बाद भागने की कोशिश की मगर उसे भी जवानों ने तत्काल मार गिराया।