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ड्रग्स से आतंक की फंडिंग: हिजबुल के दो आतंकियों पर कसा शिकंजा, कोर्ट ने जारी किए गैर-जमानती वारंट

Fri, 27 Feb 2026 11:17 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

श्रीनगर की विशेष अदालत ने नारको-टेरर फंडिंग और आतंकी गतिविधियों के मामले में हिजबुल मुजाहिदीन के दो फरार आतंकियों इम्तियाज अहमद कंदू और मंजूर अहमद खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं।
 
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) ने एलओसी पार से नारको-टेरर फंडिंग और आतंकी गतिविधियों के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। श्रीनगर की विशेष अदालत ने पाकिस्तान से संचालित हो रहे हिजबुल मुजाहिदीन के दो फरार आतंकियों इम्तियाज अहमद कंदू और मंजूर अहमद खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं।

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यह कार्रवाई सीमा पार से नशीली दवाओं की तस्करी और उससे मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में करने के गंभीर मामले में की गई है। कंदू क्रालटेंग सोपोर और मंजूर अहमद ब्रामन पंजला सोपोर का रहने वाला है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी इम्तियाज अहमद कंदू साल 2010 से लापता है और हिजबुल मुजाहिदीन का सक्रिय सदस्य है। गृह मंत्रालय ने उसे पहले ही आतंकवादी घोषित कर रखा है।

वहीं, दूसरा आरोपी मंजूर अहमद खान साल 2005 में हथियारों की ट्रेनिंग के लिए गुलाम कश्मीर गया था। जांच में सामने आया है कि ये दोनों आरोपी पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के जरिए अपने अन्य साथियों के संपर्क में थे और घाटी में अस्थिरता पैदा करने की साजिश रच रहे थे। एसआईए ने पुलिस स्टेशन सीआईके/एसआईए कश्मीर में एफआईआर नंबर 13/2022 के तहत मामला दर्ज किया है। इन आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट और कड़े आतंक विरोधी कानून यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
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इस मामले में मुख्य चार्जशीट 2022 में और पूरक चार्जशीट मई 2024 में दाखिल की जा चुकी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसआईए की जांच अभी भी जारी है। अदालत ने पाया कि दोनों आरोपी गिरफ्तारी से बच रहे हैं। आरोप गंभीर विशेष कानूनों से जुड़े होने के कारण पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसलिए गैर जमानती वारंट जारी किए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर लुक आउट सर्कुलर जारी किया जा सकता है।

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चार किलो चरस मामले में अंतरराज्यीय तस्कर को सुनाई 10 साल की सजा
नशे के खिलाफ सख्ती के संदेश के बीच लुधियाना की विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने अंतरराज्यीय चरस तस्करी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी अजीत सिंह को 10 साल के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

अदालत का यह निर्णय 2018 में दर्ज चार किलो से अधिक चरस बरामदगी मामले में आया है। मामला 20 फरवरी 2018 का है, जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की चंडीगढ़ जोनल यूनिट को गुप्त सूचना मिली थी कि लुधियाना में बड़ी मात्रा में चरस की खेप पहुंचने वाली है। सूचना पर कार्रवाई करते हुए टीम ने जाल बिछाया और जम्मू-कश्मीर के कठुआ निवासी अजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से 2.840 किलोग्राम चरस बरामद की गई।

पूछताछ में मिले सुराग के आधार पर टीम ने शहर के एक होटल में छापा मारकर उसके सहयोगी श्याम लाल को भी गिरफ्तार किया। उसके पास से 1.175 किलोग्राम चरस बरामद हुई। इस तरह एक ही दिन में कुल चार किलोग्राम से अधिक चरस जब्त की गई। एनसीबी ने अगस्त 2018 में दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान 20 नवंबर 2025 को सह-आरोपी श्याम लाल की मृत्यु हो गई, जिसके चलते उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई। वहीं अजीत सिंह के खिलाफ मुकदमा जारी रहा। अदालत ने पेश साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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