श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मीरवाइज ने कहा कि जैसे वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान बातचीत की प्रक्रिया में लौट रहे हैं, उसी तरह भारत और पाकिस्तान को भी आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए वार्ता की मेज पर आना चाहिए।
जब तनाव और टकराव के बाद भी देश बातचीत का रास्ता अपना सकते हैं, तो दक्षिण एशिया के दोनों बड़े देश भी ऐसा कर सकते हैं। उनके अनुसार युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बातचीत ही स्थायी शांति का मार्ग है।
मीरवाइज ने हाल ही में जामिया मस्जिद में दिए गए अपने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य केवल शांति और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में आर्थिक और मानव संसाधनों की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें केवल बेहतर राजनीतिक समझ और आपसी सहयोग से ही साकार किया जा सकता है। भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ताना संबंध न केवल द्विपक्षीय मुद्दों को हल कर सकते हैं, बल्कि जम्मू-कश्मीर जैसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद का भी शांतिपूर्ण समाधान संभव है।