पार्क का उद्धाटन करते मुख्यमंत्री
- फोटो : संवाद
इस दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस पार्क के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि किसी भी पुरानी या बेकार समझी जाने वाली वस्तु को फेंकने से पहले दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है। पार्क में पुरानी जीप, ट्रैक्टर, स्कूटर और यहां तक कि पुराने फ्रिज को बेहद रचनात्मक तरीके से गमलों और फूलों के सजावटी ढांचे के रूप में ढाला गया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में शहरों और गांवों में सॉलिड वेस्ट और प्लास्टिक वेस्ट का निस्तारण एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। यह पार्क लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कचरा कैसे कम कर सकते हैं।
श्रीनगर के वेस्ट टू वंडर पार्क में कार्यों को अंतिम रूप देते कर्मी।
- फोटो : संवाद
जैसे, बाजार जाते समय घर से ही बैग साथ लेकर जाएं ताकि प्लास्टिक के उपयोग और उसे नालियों में फेंकने से बचा जा सके। ट्यूलिप गार्डन और गुल ए दाउदी गार्डन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह ट्यूलिप गार्डन धीरे-धीरे विकसित होकर आज विश्व प्रसिद्ध आकर्षण बन गया है, उसी तरह इस नए पार्क और गुल ए दाउदी गार्डन को भी आने वाले समय में और बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि फ्लोरीकल्चर विभाग के अधिकारियों को चंडीगढ़ के रॉक गार्डन जैसी परियोजनाओं का अध्ययन करना चाहिए ताकि उसी तर्ज पर यहां भी वेस्ट-टू-वंडर मॉडल को एक बड़ा पर्यटन आकर्षण बनाया जा सके।
श्रीनगर के वेस्ट टू वंडर पार्क में कार्यों को अंतिम रूप देते कर्मी।
- फोटो : संवाद
घटते ग्रीन स्पेस पर उमर ने जताई चिंता
कश्मीर में तेजी से घटते ग्रीन स्पेस और अनियंत्रित निर्माण कार्यों पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गहरी चिंता जताई है। बढ़ते कंक्रीट निर्माण से जुड़े एक सवाल पर उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के कारण जमीन पर भारी दबाव है। यद्यपि समाज और आर्थिकी के लिए विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन प्राकृतिक ग्रीन स्पेस को बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उमर अब्दुल्ला ने जोर देकर कहा कि बिजली और पानी के विकल्प तो बनाए जा सकते हैं, लेकिन नष्ट हो चुकी जमीन को कभी वापस नहीं लाया जा सकता। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे निर्माण में न्यूनतम जमीन का उपयोग करें ताकि पर्यावरण का संतुलन बना रहे।