जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में बेघर लोगों को जमीन देने के बहाने यहां की डेमोग्राफी को बदलने की साजिश रची जा रही है। बाहरी लोगों को प्रदेश में बसाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घोषणा की थी कि प्रदेश में बेघर लोगों को 5-5 मरला जमीन दी जाएगी, ताकि हर वंचित को रहने के आवास नसीब हो सके। इस घोषणा के बाद ही महबूबा मुफ्ती का ये बयान आया है।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
इससे पहले मंगलवार को पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के कार्यों पर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया कि ईसीआई में निष्पक्षता और तटस्थता का अभाव है। सत्तासीन भाजपा मीडिया सहित लोकतंत्र की अन्य संस्थाओं को नुकसान पहुंचा रही है। इससे देश में खतरे की स्थिति पैदा हो गई है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने एक साक्षात्कार में आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ईसीआई वास्तव में निष्पक्ष या तटस्थ नहीं है। ईडी भी निष्पक्ष नही है।
उन्होंने महाराष्ट्र के घटनाक्रम पर कहा कि भाजपा के इशारे पर राकांपा के अजीत पवार और आठ विधायकों ने पार्टी के खिलाफ विद्रोह किया और शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल हो गए। कहा कि विपक्ष को न केवल भाजपा से बल्कि ईडी, सीबीआई और चुनाव आयोग जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह देश के लिए अच्छा नहीं है।
भाजपा पार्टियों को तोड़ने और विधायकों को खरीदने के लिए धनबल का इस्तेमाल करती है, जबकि वह भ्रष्टाचार से लड़ने के बड़े-बड़े दावे करती है। जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर महबूबा ने दावा किया कि केंद्र सरकार पंचायत, ब्लॉक, शहरी स्थानीय निकायों और संसद के चुनाव कराने की बात करती हैं, लेकिन वे विधानसभा चुनावों के बारे में बात नहीं करती। पीडीपी प्रमुख ने कहा कि भाजपा दावा कर रकी हैं कि वे जम्मू-कश्मीर को एक हिंदू मुख्यमंत्री देंगे। यदि जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए तो वे बेनकाब हो जाएंगे।