श्रीनगर के अचन लैंडफिल में कचरे की समस्या से स्थानीय लोग परेशान हैं। दुर्गंध, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और कृषि भूमि के नष्ट होने को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है। नगर निगम ने कचरे के सड़ने की प्रक्रिया तेज करने के लिए आधुनिक तकनीक तैनात की है।
श्रीनगर के उत्तरी बाहरी इलाके में स्थित अचन लैंडफिल में कचरे के सड़ने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए श्रीनगर नगर निगम ने आधुनिक तकनीकों को तैनात किया है। यह शहर का प्रमुख नगर ठोस कचरा निपटान केंद्र है। हालांकि, लैंडफिल के आसपास रहने वाले लोग लंबे समय से कचरे की दुर्गंध और उससे होने वाली परेशानियों को लेकर चिंतित हैं।
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#WATCH | Jammu & Kashmir | Srinagar Municipal Corporation deploy modern technologies to accelerate the decomposing process at the Achan landfill, Srinagar’s primary municipal solid waste disposal facility in the northern outskirts of the city. pic.twitter.com/2XqQ7lRF1U
अचन लैंडफिल के पास रहने वाले सैफुल्लाह ने कहा कि यहां रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कचरे से आने वाली दुर्गंध लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उन्होंने सरकार से अधिक मशीनरी लगाने और समस्या का जल्द समाधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
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सैफुल्लाह ने कहा कि लोग सरकार के प्रयासों की सराहना करते हैं, लेकिन आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जितनी जरूरत हो, उतना ही कचरा पैदा किया जाना चाहिए और अतिरिक्त कचरे से बचना चाहिए, क्योंकि अंततः इसका नुकसान लोगों को ही होता है।
वहीं, स्थानीय निवासी सज्जाद अहमद भट ने कहा कि यहां दुर्गंध इतनी असहनीय है कि आसपास चलना भी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने बताया कि यह इलाका पहले कृषि भूमि था और यहां धान के खेत हुआ करते थे, लेकिन अब ये खेत नष्ट हो चुके हैं।
सज्जाद अहमद भट के मुताबिक, स्थानीय लोग कचरे के इस पहाड़ से परेशान हो चुके हैं। उनका कहना है कि लोग सरकार से उन्हें कहीं और बसाने या यहां से स्थानांतरित करने की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस वातावरण के कारण होने वाली बीमारियों से यहां के जानवर अपने बाल खो रहे हैं।
स्थानीय निवासी गुलाम मोहम्मद मलिक ने बताया कि अचन में कचरा वर्ष 1990 से पड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन का अधिग्रहण करते समय स्थानीय लोगों से कहा गया था कि यहां केवल वार्ड नंबर आठ का कचरा लाया जाएगा और एक-दो ट्रक ही आएंगे।
मलिक ने कहा कि उस समय स्थानीय लोगों ने जमीन और वहां तक पहुंचने का रास्ता दे दिया, लेकिन बाद में दूसरे इलाकों से भी कचरा यहां लाया जाने लगा और धीरे-धीरे इसका विस्तार होता गया। उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो इस साइट को कहीं और स्थानांतरित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लैंडफिल को स्थानांतरित करना संभव नहीं है तो कम से कम यह सुनिश्चित किया जाए कि कचरे को साथ-साथ कंपोस्ट किया जाए। उनके मुताबिक, कचरे को पलटने के दौरान दुर्गंध और भी असहनीय हो जाती है।
गुलाम मोहम्मद मलिक ने कहा कि स्थानीय लोगों को लगातार बताया जाता है कि एक महीने इंतजार करने पर कचरा कंपोस्ट हो जाएगा और यहां फूल व बगीचे नजर आएंगे, लेकिन यह सब अभी केवल कागजों तक सीमित है। उन्होंने कहा कि यहां काम करने वाले गरीब मजदूर, परिवहनकर्मी और अन्य लोग इसके लिए जिम्मेदार नहीं हैं। वे मजबूरी में प्रशासन का काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि आसपास के घरों में बड़ी संख्या में लोग बीमार हैं।