फिल्म की कहानी सोना नाम की एक लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जो चाहती है कि लोग उसे उसकी सीमाओं के बजाय उसकी क्षमताओं के लिए पहचानें। सोना का किरदार नुब्रा के चरासा की स्टैनजिन पलकित ने निभाया है। गधे पर निर्भर रहने से लेकर साइकिल के जरिए आत्मनिर्भरता हासिल करने तक सोना की यात्रा शिक्षा, अवसर और आत्मविश्वास की बड़ी कहानी बन जाती है।
यह परियोजना फिल्ममेकर और शिक्षिका श्वेता पारख के लद्दाख में बच्चों और शिक्षकों के साथ किए जा रहे कार्य से निकली। वर्ष 2024 में उनकी टीम ने जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान लेह में एक मल्टी-सेट फिल्म और मीडिया स्टूडियो भी स्थापित किया, जिसमें करीब आठ सेट हैं और यह लगभग 750 वर्ग फुट क्षेत्र में बनाया गया है। इसका उद्देश्य पीएम ई-विद्या पहल के तहत स्थानीय संदर्भों से जुड़ी शैक्षिक सामग्री तैयार करना है।
फिल्म की प्रेरणा विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए शिक्षा और खेल के अवसरों तक पहुंच से जुड़ी चुनौतियों से मिली। इसकी परिकल्पना ताशी ग्यालसन के नेतृत्व में, उनके लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल, लेह के चेयरमैन के कार्यकाल के दौरान की गई थी। बाद में इसे केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के स्कूल शिक्षा विभाग का सहयोग मिला। फिल्म का निर्देशन राकेश नायर और श्वेता पारख ने किया है। इसके निर्माता राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर जितेंद्र मिश्रा, श्वेता पारख और यश नागरकोटी हैं।
कान्स फिल्म फेस्टिवल के भारत मंडप में प्रस्तुति के बाद लिटिल बिग ड्रीम्स का भारतीय प्रीमियर 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 में हुआ। फिल्म के युवा कलाकार स्टैनजिन पलकित, स्टैनजिन सलडोन और लेक्जेस आंगमो ने मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर लद्दाख के बच्चों के सपनों और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व किया।
लिटिल बिग ड्रीम्स शॉर्ट फिल्म की झलक
- फोटो : सोशल मीडिया
फिल्म को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान भी मिली है। जुलाई 2026 में मोरक्को में आयोजित 14वें शेफशावेन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल फॉर चिल्ड्रेन एंड यूथ में लिटिल बिग ड्रीम्स ने द्वितीय सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार हासिल किया।
इस परियोजना का प्रभाव सिनेमा से आगे भी दिखाई दिया है। फिल्म को मिली प्रतिक्रिया के बाद लद्दाख के 13 विशेष जरूरतों वाले बच्चे सहायता और उपचार के लिए मुंबई आए। इनमें से नौ बच्चे श्रवण बाधित थे और सात बच्चों में उपचार एवं स्पीच थेरेपी के बाद सुनने और बोलने की क्षमता में सुधार की जानकारी सामने आई।
अब टीम लिटिल बिग ड्रीम्स को लद्दाख के स्कूलों तक ले जाने की योजना बना रही है। इसके साथ शिक्षकों और अभिभावकों के लिए शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। उद्देश्य है कि सिनेमा के माध्यम से समावेशी शिक्षा, थेरेपी, खेल और विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए वैकल्पिक अवसरों को बढ़ावा दिया जाए। लद्दाख की कक्षाओं से लेकर कान्स, मुंबई और मोरक्को तक पहुंची 'लिटिल बिग ड्रीम्स' दुनिया को एक सरल संदेश दे रही है। हर बच्चे को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए।