दोनों दोषियों ने पीड़िता पर हमला तब किया था, छात्रा कॉलेज जा रही थी। अदालत ने कहा, दोनों पक्षों द्वारा दी गई दलीलों पर विचार करने के बाद लगता है कि दोषी नरमी के पात्र नहीं हैं। आजीवन कारावास की सजा के अलावा कोई अन्य सजा पीड़िता को पूर्ण न्याय नहीं दे सकती।
वर्ष 2014 में 11 दिसंबर को श्रीनगर के नौशेरा में कानून की छात्रा पर तेजाब हमला करने के दो दोषियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाते हुए श्रीनगर के प्रिंसिपल सेशन जज श्रीनगर जवाद अहमद ने मंगलवार को कहा, ऐसी घृणित मानसिकता रखने वाले व्यक्ति पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। अदालत ने वजीरबाग के इरशाद अमीन वानी और बेमिना के मोहम्मद उमर नूर को मामले में दोषी ठहराया था।
विज्ञापन
दोनों दोषियों ने पीड़िता पर हमला तब किया था, छात्रा कॉलेज जा रही थी। अदालत ने कहा, दोनों पक्षों द्वारा दी गई दलीलों पर विचार करने के बाद लगता है कि दोषी नरमी के पात्र नहीं हैं। आजीवन कारावास की सजा के अलावा कोई अन्य सजा पीड़िता को पूर्ण न्याय नहीं दे सकती। इसलिए दोषियों को धारा 326-ए आरपीसी के साथ धारा 120-बी आरपीसी के तहत दंडनीय अपराध के लिए आजीवन कारावास और पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई जाती है। अदालत ने कहा कि जुर्माना वसूल होने पर पीड़ित को भुगतान किया जाएगा। जुर्माना अदा न करने पर दोषियों को तीन साल के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने धारा 120-बी आरपीसी (आपराधिक साजिश) के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोनों को 10 साल की कैद और प्रत्येक को 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि जुर्माना अदा न करने पर उन्हें एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
दोषियों को आरपीसी की धारा 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के तहत दंडनीय अपराध के लिए तीन साल की कैद की सजा भी सुनाई गई और प्रत्येक पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और जुर्माना न चुकाने पर उन्हें छह महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। विभिन्न अपराधों के लिए दोषियों को दी गई सजा एक साथ चलेगी।
विज्ञापन
इस बीच अदालत ने पीड़िता के मामले को जम्मू-कश्मीर कानूनी सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव को जम्मू-कश्मीर पीड़ित मुआवजा योजना 2019 के संदर्भ में अधिकतम मुआवजा देने की भी सिफारिश की। उन्होंने कहा, पीड़िता ने अपने इलाज पर जो बड़ी राशि खर्च की है और उसके आगे के इलाज के लिए आवश्यक राशि को ध्यान में रखते हुए अधिकतम मुआवजा देने के लिए सदस्य सचिव, जम्मू-कश्मीर कानूनी सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के मामले की सिफारिश करना उचित समझता हूं। पीड़िता को जम्मू-कश्मीर पीड़ित मुआवजा योजना 2019 के संदर्भ में निश्चित रूप से योजना के तहत उसे पहले से भुगतान किए गए अंतरिम मुआवजे के समायोजन के अधीन है।