लेह, कारगिल, जंस्कार और चांगथांग के लोगों के लिए सवाल बना, क्या यह धनराशि उनके दैनिक जीवन में ठोस सुधार ला पाएगी
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। केंद्रीय बजट 2026-27 में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लिए स्थापना व्यय के तहत 4,869.31 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। हालांकि यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्शाती है। हालांकि लेह, कारगिल, जंस्कार और चांगथांग के लोगों के यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह धनराशि उनके दैनिक जीवन में ठोस सुधार ला पाएगी।
बता दें कि केंद्रीय बजट 2024-25 में 5,958 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था। 2025-26 में राशि घटकर लगभग 4,692.15 करोड़ रुपये रह गई। अब मौजूदा बजट को आंशिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है। कुल राशि में से 2,542.26 करोड़ रुपये राजस्व व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसमें मुख्यतः वेतन, पुलिस व्यवस्था और प्रशासनिक सेवाएं शामिल हैं। जबकि 2,327.05 करोड़ रुपये सड़कों, बिजली प्रणालियों, अस्पतालों, स्कूलों और जल अवसंरचना जैसी पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च किए जाएंगे। लगभग 177 करोड़ रुपये की वृद्धि से यह संकेत मिलता है कि गिरावट का दौर थम गया है। हालांकि फंडिंग अभी भी पहले के स्तर तक नहीं पहुंची है।
अपेक्षाकृत कम आबादी के बावजूद दूरस्थ और ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्र में अवसंरचना बनाए रखने की लॉजिस्टिक और सुरक्षा लागत के कारण लद्दाख को प्रति व्यक्ति अधिक आवंटन मिलता है। असली चुनौती यही है कि क्या यह खर्च जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम दे पाएगा। ऊर्जा और कनेक्टिविटी इस बार प्रमुख प्राथमिकताएं नजर आती हैं। लद्दाख को 13,000 मेगावाट के नवीकरणीय ऊर्जा पार्क और ट्रांसमिशन अपग्रेड जैसी राष्ट्रीय योजनाओं में शामिल किया गया है। इनका उद्देश्य दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली की विश्वसनीयता बढ़ाना है। वितरण सुधार और रूफटॉप सोलर पहल भी जारी हैं। लोगों को उम्मीद है कि इससे सर्दियों में होने वाली बिजली कटौती कम होगी और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
सड़क और सुरंग परियोजनाएं भी फोकस में हैं जिनमें हर मौसम में संपर्क सुनिश्चित करने के प्रयास और उन प्रमुख मार्गों पर काम शामिल है जो कड़ी सर्दियों के दौरान अक्सर बंद हो जाते हैं। कई लद्दाखियों के लिए सफलता का मतलब नई परियोजनाओं की घोषणाएं नहीं, बल्कि सालभर सुरक्षित और निर्बाध यात्रा होगा।
बजट में विज्ञान और एस्ट्रो-टूरिज्म के क्षेत्र में लद्दाख की उभरती भूमिका को भी रेखांकित किया गया है। प्रमुख दूरबीन सुविधाओं के उन्नयन और हानले डार्क स्काई रिजर्व के आसपास बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना है। ये पहल शोधकर्ताओं और उच्च-स्तरीय पर्यटन को आकर्षित कर सकती हैं लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब स्थानीय समुदाय, छात्र और व्यवसाय इसमें सार्थक रूप से शामिल हों।
आवास, स्वास्थ्य सेवा, जल आपूर्ति और आजीविका कार्यक्रमों जैसी प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं प्रगति के महत्वपूर्ण संकेतक बनी रहेंगी। हर घर तक नल कनेक्शन, ऊंचाई वाले क्षेत्रों के अनुकूल सुरक्षित आवास, सुलभ चिकित्सा सेवाएं और कौशल-आधारित रोजगार सुनिश्चित करना प्रशासन की प्रभावशीलता की अहम परीक्षा होगी। लद्दाख की वित्तीय संरचना अब भी काफी हद तक केंद्र के नियंत्रण में है। स्वायत्त हिल काउंसिल, पंचायतें और नागरिक समाज अक्सर अंतिम आवंटन पर कम प्रभाव रखते हैं जबकि वे सीधे जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक परामर्श, जिला-स्तरीय खर्च का पारदर्शी डेटा और नियमित सामाजिक ऑडिट से जनता का भरोसा मजबूत हो सकता है।
देश के बाकी हिस्सों के लिए लद्दाख एक सीमांत और पर्यटन का आकर्षण हो सकता है लेकिन यहां के लोगों के लिए बजट जीवन, अवसर और गरिमा से जुड़ा हुआ है। आने वाले वर्ष में इसकी सफलता का आकलन नीतिगत बयानों से नहीं बल्कि रोजमर्रा की हकीकत से होगा। कारगिल में भरोसेमंद पेयजल, जंस्कार के छात्रों के लिए कार्यशील छात्रावास, और कड़ी सर्दियों के बीच परिवारों के लिए विश्वसनीय बिजली व स्वास्थ्य सेवाएं।
अंततः, 4,869.31 करोड़ रुपये का यह आवंटन समावेशी विकास का आधार बनता है या सिर्फ एक आंकड़ा साबित होता है, यही तय करेगा कि लद्दाख संतुलित और टिकाऊ विकास की दिशा में कितना आगे बढ़ पाता है।