संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद कारगिल के पूर्व कार्यकारी पार्षद स्कालजंग वांग्याल गारा ने केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को ऐतिहासिक पिपितिंग गुरु मठ के संरक्षण और विकास की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मध्य जंस्कार की एक प्रमुख पहाड़ी पर स्थित इस मठ के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया गया। यह स्थल क्षेत्र के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है और स्थानीय समुदाय के साथ-साथ व्यापक हिमालयी बौद्ध समाज के लिए गहरी आध्यात्मिक आस्था का केंद्र है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अपनी रमणीय स्थिति और चारों ओर के मनोहारी दृश्यों के कारण इस मठ में एक प्रमुख विरासत पर्यटन स्थल बनने की अपार संभावनाएं हैं। हालांकि, कठोर जलवायु परिस्थितियों, पुरातनता और संरक्षण सहयोग के अभाव के कारण यह संरचना धीरे-धीरे जर्जर हो रही है।
प्रस्ताव में व्यापक संरक्षण एवं विकास कार्यों की मांग की गई है जिनमें संरचनात्मक पुनर्स्थापन, प्राचीन भित्ति चित्रों और पवित्र धरोहरों का संरक्षण, सुरक्षित पहुंच मार्गों का निर्माण, पर्यटक सुविधाओं की स्थापना तथा पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन अवसंरचना का विकास शामिल है।
इस पहल से जंस्कार में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने, स्थानीय निवासियों के लिए आजीविका के अवसर सृजित होने तथा भारत के बौद्ध पर्यटन सर्किट में लद्दाख की स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है।
मुलाकात के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कथित रूप से आश्वासन दिया कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा और परियोजना को किसी उपयुक्त केंद्रीय सरकारी योजना के तहत शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। वैकल्पिक रूप से, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन को इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर लेने की सलाह दी जा सकती है।