- लद्दाख के मुख्य सचिव ने लेह में जेकेएएस अधिकारियों के साथ किया संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
लेह। लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने लेह जिले में पदस्थ जेकेएएस अधिकारियों के साथ सोमवार को संवादात्मक बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि अधिकारी कठोर प्रशासनिक ढांचों तक सीमित न रहें बल्कि जनसमस्याओं के समाधान के लिए स्वतंत्र और नवोन्मेषी सोच अपनाएं।
इस संवाद का उद्देश्य खुला संवाद स्थापित करना, जमीनी हकीकत को समझना तथा क्षेत्र में जन-केंद्रित शासन को और अधिक सुदृढ़ करना था। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से संक्षिप्त परिचय प्राप्त किया और उन्हें अपने विचार व अनुभव खुलकर साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने नियमित क्षेत्रीय दौरों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जब तक अधिकारी गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों तक नहीं पहुंचेंगे तब तक लोगों की शिकायतों और बुनियादी आवश्यकताओं को पूरी तरह समझना संभव नहीं है।
उन्होंने मोबाइल कनेक्टिविटी, आवश्यक सेवाओं की पहुंच और बुनियादी ढांचे की कमियों जैसे मुद्दों को रेखांकित किया। कहा कि स्थानीय अधिकारी जो क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और संस्कृति से भली-भांति परिचित हैं, अपने-अपने क्षेत्रों में सार्थक परिवर्तन लाने की सबसे बेहतर स्थिति में हैं। युवाओं से संवाद के महत्व पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि युवा ही लद्दाख का भविष्य गढ़ेंगे। उन्हें पारंपरिक सरकारी नौकरियों से आगे बढ़कर अन्य अवसरों की तलाश के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। उन्होंने लद्दाख की विशिष्ट क्षमताओं से जुड़े क्षेत्रों में उद्यमिता, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने पर बल दिया।
आशीष कुंद्रा ने स्वच्छता बनाए रखने में लेह नगर पालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि लेह लद्दाख का प्रवेश द्वार है और यहां आने वाले पर्यटकों पर पहला और स्थायी प्रभाव डालता है। उन्होंने शहर को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और स्वागतयोग्य बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। मुख्य सचिव ने भूटान की तर्ज पर लद्दाख को एक उच्च-मूल्य, सतत पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की अवधारणा पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बड़े पैमाने पर पर्यटन के बजाय गुणवत्तापूर्ण और अधिक खर्च करने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने पर जोर दिया।
इस दौरान जेकेएएस अधिकारियों ने विभिन्न मुद्दे और सुझाव रखे जिनमें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियां और कल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रति जनता में अधिक जागरूकता की आवश्यकता शामिल थी। अधिकारियों ने पश्मीना, बागवानी, सी-बकथॉर्न जैसे लद्दाख के विशिष्ट और मूल्यवान संसाधनों तथा पश्मीना आधारित गतिविधियों, विमानन, आतिथ्य, शीतकालीन पर्यटन और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में युवाओं के लिए उद्यमिता की संभावनाओं को भी उजागर किया।