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लद्दाख एलजी का बड़ा फैसला: अब नहीं होगी फाइलों में देरी, लद्दाख में लैंड यूज मंजूरी प्रक्रिया हुई आसान

Sun, 02 Aug 2026 06:09 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला, नेटवर्क लेह

सार

लद्दाख के उपराज्यपाल ने भूमि उपयोग मंजूरी की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए मुख्य सचिव और मंडलायुक्त को भी अधिकार दिए हैं। इससे लोगों को घर, कारोबार और विकास कार्यों के लिए जल्द मंजूरी मिलेगी और प्रशासनिक देरी कम होगी।
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उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना - फोटो : ANI
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विस्तार
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विकास कार्यों को गति देने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने भूमि उपयोग (लैंड यूज) से जुड़े प्रस्तावों की मंजूरी देने की शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अब नगर पालिका क्षेत्रों के बाहर विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन की मंजूरी मुख्य सचिव और मंडलायुक्त भी दे सकेंगे।

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इस संबंध में जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह निर्णय केंद्र शासित प्रदेश में जनहित और नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

इससे पहले 8 जुलाई को उपराज्यपाल ने दो कनाल तक की भूमि पर आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और मिश्रित उपयोग के विकास कार्यों के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। अब नई व्यवस्था के तहत दो कनाल से अधिक और चार कनाल तक की भूमि के भूमि उपयोग परिवर्तन को मंजूरी देने का अधिकार मंडलायुक्त को दिया गया है।

वहीं, चार कनाल से अधिक और दो एकड़ तक की भूमि के मामलों में मंजूरी का अधिकार मुख्य सचिव को सौंपा गया है। दो एकड़ से अधिक भूमि के भूमि उपयोग परिवर्तन के प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय पहले की तरह उपराज्यपाल ही लेंगे।

अब तक सभी मामलों में मंजूरी का अधिकार केवल उपराज्यपाल के पास था जिससे कई बार विकास परियोजनाओं और भवन निर्माण संबंधी प्रस्तावों में देरी होती थी। नई व्यवस्था से आवेदन प्रक्रिया तेज होगी और लोगों को अनावश्यक प्रशासनिक विलंब का सामना नहीं करना पड़ेगा।

प्रशासन का कहना है कि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के विजन के अनुरूप है। लद्दाख में अभी तक मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान अधिसूचित नहीं होने के कारण भूमि उपयोग से जुड़े मामलों में कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतें सामने आ रही थीं। ऐसे में यह अंतरिम व्यवस्था लोगों को राहत देने के लिए लागू की गई है।
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नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब घर बना सकेंगे, व्यावसायिक प्रतिष्ठान खोल सकेंगे, छोटे स्तर के औद्योगिक कार्य शुरू कर सकेंगे और मिश्रित उपयोग वाली परियोजनाएं भी अपेक्षाकृत कम समय में स्वीकृत करा सकेंगे।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन को अधिक सरल, पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाना है, ताकि वैधानिक योजना दस्तावेजों के अभाव में लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। उन्होंने कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण और नियोजन संबंधी आवश्यकताओं के बीच संतुलन भी बनाए रखेगी।

राजस्व विभाग को नगर पालिका क्षेत्रों के बाहर भूमि उपयोग और निर्माण गतिविधियों के प्रभावी नियमन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक मास्टर प्लान, जोनल डेवलपमेंट प्लान और संबंधित वैधानिक नियम अधिसूचित नहीं हो जाते।
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