तेहरान में चार दिन तक युद्ध क्षेत्र में फंसे रहने के बाद डरी-सहमी मेडिकल छात्राएं वीरवार को जब दिल्ली पहुंचीं तो उन्हें लेने भेजी गईं जर्जर बसें देख बिफर पड़ीं। तमाम तरह की मुसीबतें झेलने के बाद अपने हौसले को समेटते-समेटते वह थक सी गईं थीं और उनका गुस्सा फूट पड़ा। कहने लगीं कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बेटे यदि चार दिन युद्ध क्षेत्र में फंसे रहने के बाद आते तो क्या वे ऐसी ही जर्जर बसों से उन्हें बुलाते।
एक छात्रा सबा ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वह तेहरान में एक छात्रावास में रहती हैं। शनिवार को तेहरान में हमले के बाद से सभी विद्यार्थी बेहद डरे हुए थे। मैं भारत सरकार का शुक्रिया अदा करती हूं कि उनकी वजह से हम आ सके। हमें उम्मीद नहीं थी कि यहां से निकल पाएंगे।
भारतीय दूतावास ने उन्हें वहां से निकाला। दिल्ली आने पर जेकेएसआरटीसी की बेहद खराब बसों को उन्हें लेने के लिए भेजा। सभी स्टूडेंट्स इसे लेकर नाराज थे। वह परिवार की मदद से फ्लाइट के जरिए श्रीनगर आईं। बाद में पता लगा कि छात्रों को लेने नई बस भेजी गई हैं।