मलिक दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। उसने दावा किया कि आरोप एक मनगढ़ंत कहानी जैसे लगते हैं। उसका तर्क है कि यह मामला उसे फंसाने के लिए दशकों बाद गढ़ा गया है। हलफनामे में 60 वर्षीय मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल हुसैन मुल्लिक से निकाह तोड़ने का फैसला भी सुनाया। उसने अपनी लंबी कैद और आठ साल से परिवार से संपर्क न कर पाने को इसका कारण बताया। उसे फोन कॉल या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा नहीं मिली। मलिक ने अपनी बेटी को दादा-दादी को रोज पांच मिनट फोन करने की सलाह दी। उसने कहा कि उसने अपना पूरा मामला ईश्वर के हाथों में छोड़ दिया है।
मलिक के हलफनामे में लिखी थी यह बात
मलिक ने हलफनामे में कहा कि वह आगे मुकदमे की कार्रवाई का बचाव नहीं करेगा। उसने स्पष्ट किया कि उसके इस फैसले को अभियोजन के किसी तथ्य, दोष या आरोपों की स्वीकृति नहीं माना जाना चाहिए। मलिक ने अदालत से मृत्युदंड देने का अनुरोध किया है। जेकेएलएफ प्रमुख ने यह भी कहा कि उसे राजनीतिक कारणों से झूठा फंसाया गया है।
सरला भट्ट हत्याकांड
मलिक का यह हलफनामा राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) द्वारा आरोपपत्र दाखिल करने के बाद आया है। एसआईए ने 29 जून को सरला भट्ट हत्याकांड में आरोपपत्र दाखिल किया था। सरला भट्ट एक कश्मीरी पंडित महिला थीं, जिनकी 19 अप्रैल, 1990 को हत्या कर दी गई थी। यासीन मलिक को इस मामले में आरोपी बनाया गया है।