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लद्दाख का ‘शेर’ हुआ खामोश: कारगिल के वीर नायक कर्नल सोनम वांगचुक नहीं रहे, महावीर चक्र विजेता का निधन

Fri, 10 Apr 2026 05:46 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, लेह

सार

कारगिल युद्ध के वीर नायक और महावीर चक्र से सम्मानित सोनम वांगचुक का लेह में आकस्मिक निधन हो गया।
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1999 में के. आर. नारायणन द्वारा महावीर चक्र लेते दिवंगत सोनम वांगचुक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कारगिल युद्ध के वीर योद्धा कर्नल सोनम वांगचुक का शुक्रवार सुबह लेह में आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे लद्दाख क्षेत्र सहित देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। वे महावीर चक्र से सम्मानित एक बहादुर सैन्य अधिकारी थे, जिन्होंने अपनी वीरता और नेतृत्व से इतिहास रचा।

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कारगिल युद्ध में दिखाई अदम्य वीरता
कर्नल वांगचुक ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान लद्दाख स्काउट्स में मेजर के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने 18,000 फीट की ऊंचाई पर बतालिक सेक्टर के चोरबत ला क्षेत्र में एक साहसिक अभियान का नेतृत्व करते हुए दुश्मन से एक महत्वपूर्ण चोटी को दोबारा हासिल किया। यह ऑपरेशन विजय की शुरुआती और निर्णायक सफलताओं में गिना जाता है।

राष्ट्र सेवा के लिए मिला महावीर चक्र
उनकी बहादुरी और नेतृत्व के लिए उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। कर्नल वांगचुक को भारतीय सेना के एक प्रेरणादायक और समर्पित अधिकारी के रूप में जाना जाता था।

नेताओं ने जताया गहरा शोक

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लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका साहस और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा और पूर्व सांसद जम्यांग त्सेरिंग नामग्याल ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी वीरता को अविस्मरणीय बताया।

लद्दाख में श्रद्धांजलि और सम्मान
डॉ. मोहम्मद जाफर अखून और ताशी ग्यालसन सहित कई नेताओं और संगठनों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया। ताशी ग्यालसन ने उन्हें 'लद्दाख का असली शेर' बताते हुए कहा कि उनका साहस हमेशा याद रखा जाएगा।

देश के लिए अपूरणीय क्षति
कर्नल सोनम वांगचुक का निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे लद्दाख और देश के लिए एक बड़ी क्षति है। उनका जीवन साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक रहा है।

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