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घाटी में पर्यटन को बचाने के लिए जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर अनिश्चतता खत्म हो

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श्रीनगर में आयोजित बैठक के दौरान संसदीय समिति के सदस्य। - फोटो : SHRINAGAR
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संसदीय समिति से मिलने वाले विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने कहा कि जम्मू-श्रीनगर हाईवे को लेकर अनिश्चितता का माहौल समाप्त होना चाहिए। हवाई यातायात को सुविधाजनक बनाने के साथ ही परिवहन व्यवस्था में और सुधार करने की जरूरत है। कहा कि यदि घाटी में पर्यटन को बढ़ावा देना है तो इनमें सुधार आवश्यक है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे के लगातार बंद होने से पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही हवाई किराया में बढ़ोतरी से भी पर्यटक मुंह मोड़ रहे हैं। समिति से मिलने वाले कश्मीर चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष शेख आशिक हुसैन ने कहा कि श्रीनगर-जम्मू हाईवे के लगातार बंद होने का स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

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हाईवे बंद होने के साथ ही हवाई किराए में बढ़ोतरी हो जाती है। हाईवे के विस्तारीकरण में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कश्मीर हाउसबोट ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हमीद वांगू ने कहा कि उन्होंने जम्मू से श्रीनगर के बीच सीधी रेल लिंक तथा हवाई किराए पर नियंत्रण की मांग की। ऑल जेएंडके शिकारा यूनियन के अध्यक्ष गुलाम अहमद कोलू ने कहा कि ज्यादातर शिकारों की स्थिति जर्जर हो गई है। हमने सस्ते दर पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है ताकि अपने कारोबार को फिर से जीवित कर सकें और डल व नगीन झील में आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिल सके। यूनाइटेड टूरिज्म फोरम के चेयरमैन मंजूर अहमद पख्तून ने कश्मीर घाटी में पर्यटन उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए पैकेज देने की मांग की। कहा कि एक समय में 2500 हाउस बोट थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर मात्र 950 ही रह गई है।

जम्मू-कश्मीर के विकास में पिछड़ने के लिए पूर्ववर्ती सरकारें जिम्मेदार: जितेंद्र
केंद्रीय मंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास के क्षेत्र में पिछड़ने के लिए पूर्ववर्ती सरकारें जिम्मेदार हैं। मोदी सरकार में काफी विकास कार्य शुरू हुए हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सभी प्रोजेक्ट रुके पड़े थे, जिसे भाजपा सरकार ने शुरू कराया। जम्मू-कश्मीर में नौ प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। 2013 से रेटले प्रोजेक्ट पर काम बंद था, जिसे अब जाकर मंजूरी मिली है।
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इसके साथ ही पक्कलडुल, कीरू, दुलहस्ती-2 व उड़ी-2 प्रोजेक्ट भी शुरू किया गया है। शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट को 45 साल बाद मंजूरी मिल सकी है। अगले दो साल में प्रदेश सरप्लस बिजली पैदा करने लगेगा। उन्होंने कहा कि घाटी में रेलगाड़ी न पहुंचने के लिए पूर्व की सरकारें जिम्मेदार हैं क्योंकि 2014 से रियासी में एलाइनमेंट की वजह से पटरी बिछाने का काम बंद पड़ा था। उनकी सरकार ने एलाइनमेंट को लेकर कई बैठकें की और फिर इसे शुरू कराया। अब रियासी में विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे पुल बनाने का काम अंतिम चरण में है।

उम्मीद है कि दो साल में घाटी में सीधी ट्रेन पहुंचने लगेगी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद की वजह से भी यहां विकास कार्य पर असर पड़ा था। इसके साथ ही कोरोना की वजह से पिछले कुछ महीनों से विकास कार्य रुके पड़े थे जिसे अब गति मिल पाई है। विश्वास जताया कि हर मोर्चे पर विकास को गति मिलेगी और जम्मू-कश्मीर अन्य राज्यों की तरह विकास करेगा।

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