उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री, जम्मू-कश्मीर
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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ हलकों के दबाव में नहीं आएंगे और अजमेर दरगाह पर चादर भेजने की वार्षिक परंपरा जारी रखेंगे। कहा कि धर्म को सियासत से अलग रखा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता। धर्म के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं, राजनीति की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अजमेर दरगाह के साथ विभिन्न धर्मों के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। सीएम ने कहा कि यह सही है कि सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिदों के नीचे मंदिर खोजने की कोशिश करने वालों पर रोक लगा दी है। जब कोर्ट कोई समग्र निर्णय लेगा, तो वह सभी के लिए बाध्यकारी होगा।
उन्होंने कहा, मैं सुबह अपनी अलमारी यह सोचकर नहीं खोलता कि मैं उस दिन क्या पहनूंगा या कोई संदेश भेजने के उद्देश्य से पहनूंगा। मैं सोजनी टोपी पहनता हूं, क्योंकि यह मेरी विरासत का हिस्सा है। मैंने जम्मू में पगड़ी पहनी, क्योंकि मैं सभी संस्कृतियों का सम्मान करता हूं। इससे मेरा विश्वास कमजोर नहीं होता है। कहा, सरकार को धर्मनिरपेक्ष छवि पेश करने के लिए कुछ भी करने की जरूरी नहीं है। कश्मीर घाटी के लोग जब भी जरूरत पड़ती है, आगे आते हैं। हाल ही में हुई बर्फबारी के दौरान, हमने यह देखा है। लोगों ने पर्यटकों के लिए अपने घर और मस्जिद खोल दिए।