लेह। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर व लद्दाख सहकारिता विभाग के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए है। इसका उद्देश्य स्थानीय किसानों को सशक्त बनाने, सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में आजीविका को बढ़ावा देना है।
यह समझौता स्थानीय सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों व प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के माध्यम से आवश्यक खाद्य सामग्री की खरीद एवं आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। इससे स्थानीय उत्पादकों को स्थायी बाजार उपलब्ध होगा।
एमओयू पर आईटीबीपी एनडब्ल्यूएफ के उप महानिरीक्षक लक्ष्मण यादव तथा लद्दाख सहकारिता विभाग की सचिव भानु प्रभा ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। यह समझौता प्रारंभिक तौर पर तीन वर्षों के लिए किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि यह पहल लद्दाख के किसानों के सामने आने वाली सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इसस उत्पादों के लिए स्थिर बाजार की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। इस व्यवस्था के तहत आईटीबीपी ने चालू वित्तीय वर्ष में पंजीकृत सहकारी समितियों, एफपीओ और प्राथमिक कृषि समितियों के माध्यम से सब्जियों और अन्य उत्पादों की खरीद के लिए 21 लाख रुपये की प्रारंभिक राशि निर्धारित की है।
इस पहल को ऐतिहासिक कदम बताते हुए उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह एमओयू स्थानीय सहकारी संस्थाओं और सीमावर्ती गांवों के लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा। साथ ही स्थानीय आपूर्ति शृंखला को भी मजबूत करेगा।
उन्होंने कहा सब्जियों और अन्य उत्पादों की खरीद के लिए आईटीबीपी की तरफ से 21 लाख रुपये का आवंटन एक अच्छी शुरुआत है। इससे सीमावर्ती गांवों के किसान अधिक सब्जियों की खेती के लिए प्रोत्साहित होंगे। उनकी आजीविका में सुधार होगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। अधिकारियों ने कहा कि इससे स्थानीय कृषि, बागवानी, पशुपालन और डेयरी उत्पादों की खरीद के लिए एक व्यवस्थित संस्थागत तंत्र स्थापित होगा।
यह व्यवस्था स्थानीय उत्पादकों को सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ लद्दाख के दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में कार्यरत सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिरता को भी मजबूत करेगी।