कारगिल। लद्दाख में आक्रामक कीट बफ टिप मॉथ के प्रसार को लेकर कारगिल के कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किए गए एक अध्ययन ने चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह कीट क्षेत्र की नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और स्थानीय वनस्पति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
जून 2021 से अगस्त 2023 तक चले इस अध्ययन को डॉ. मोहम्मद हुसैन, सरकारी डिग्री कॉलेज जंस्कार में चिड़ियाविज्ञान के सहायक प्रोफेसर की देखरेख में किया गया। इसमें हिमालयी क्षेत्र में इस मॉथ के तेजी से प्रसार और विनाशकारी प्रभाव का दस्तावेजीकरण किया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि यह आक्रामक प्रजाति अपने पौधे को मात्र 30 दिनों में पूरी तरह से पत्तियों से वंचित कर सकती है। यह कीट सुरु घाटी में मजबूत पकड़ बना चुका है, खासकर लद्दाख के ठंडे शुष्क वातावरण में पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण सलिक्स अल्बा (श्वेत विलो) प्रजाति को प्रभावित कर रहा है। अध्ययन में कीट को नियंत्रित करने और निरंतर निगरानी, पारिस्थितिक मूल्यांकन और प्रभावी प्रबंधन रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
वैज्ञानिकों की एक टीम ने क्षेत्र का दौरा कर कीट की मौजूदगी की पुष्टि की और संक्रमण की सीमा का आकलन किया। सुरु घाटी के कई गांवों में क्षेत्रीय सर्वेक्षण किए गए, जिनमें मिंजी, कुम्बाथांग, फारूना, खाचन, लंकरचेय, थ्यूना, थासगम और सांको शामिल हैं, जहां सलिक्स प्रजातियों की पत्तियों को नुकसान पहुंचा पाया गया।
अधिकारियों ने कहा कि फेलेरा प्रजाति के रूप में पहचाने गए इस आक्रामक कीट की प्रकृति अत्यधिक भक्षक और बहुभक्षी है, जो वृक्षों को कम समय में पूरी तरह पत्तीरहित कर सकता है।
सर्वेक्षण के दौरान, वैज्ञानिकों ने देखा कि कीट वर्तमान में प्यूपेशन अवस्था में है। खाचन तथा फारूना गांवों में विलो वृक्षों के आसपास मिट्टी के कचरे में प्यूपे पाए गए।
विशेषज्ञों ने स्थिति को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए प्रभावित क्षेत्रों तक घुसपैठिए प्रजाति को सीमित करने के लिए तत्काल उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।