लेह। नई दिल्ली में लद्दाख के प्रतिनिधियों और गृह मंत्रालय के बीच हुई हालिया हाई पावर कमेटी की बैठक के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कमेटी सदस्य कुंज़ेस डोलमा ने कहा, धारा 371 और विधानसभा वाले यूटी प्रदेश के मुद्दे नहीं उठाए गए।
यूनियन टेरिटरी के भविष्य को लेकर क्षेत्रीय संगठनों के बीच बढ़ते मतभेदों के बीच कमेटी सदस्य कुंज़ेस डोलमा आलोचनाओं का सामना कर रही हैं।
आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए डोलमा के अनुसार, बैठक से पहले लेह एपेक्स बॉडी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के बीच हुई चर्चा में यह तय हुआ था कि बातचीत को केवल आर्टिकल 371 जैसे सुरक्षा प्रावधानों और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश के मुद्दे पर केंद्रित रखा जाएगा, जबकि सिक्स्थ शेड्यूल और राज्य के दर्जे जैसे संवेदनशील विषयों से बचा जाएगा। हालांकि, उनका दावा है कि बैठक का एजेंडा बदल गया जब राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया गया और इस पर काफी समय चर्चा होती रही। डोलमा ने कहा कि वह इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेतीं। उन्होंने अपनी भूमिका को सरकार और जनता के बीच एक सेतु बताया। कहा कि विवाद से बचने के लिए चुप रहना उनकी भागीदारी के उद्देश्य को ही खत्म कर देता।
उन्होंने सिक्स्थ शेड्यूल की सार्वजनिक मांग और ड्राफ्ट प्रस्तावों में “सिक्स ए” के उल्लेख के बीच असंगति पर भी सवाल उठाए और नेताओं से पारदर्शिता बनाए रखने तथा जनता को स्पष्ट जानकारी देने की अपील की।
राज्य का दर्जा मिलने पर खनन और हाइड्रो व सोलर परियोजनाओं के विस्तार से राजस्व जुटाने के सुझाव को भी डोलमा ने चिंता का विषय बताया।
उन्होंने इसे विरोधाभासी बताते हुए कहा कि लद्दाख में कई आंदोलन पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित रहे हैं। उन्होंने कहा, “जिन संसाधनों की रक्षा के लिए हम आंदोलन कर रहे थे, उन्हीं का उपयोग करने की बात हमें सरकार के सामने असंगत दिखाती है।”
बैठक के अंत में एपेक्स बॉडी और केडीए ने विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश के मुद्दे पर एक नया ड्राफ्ट प्रस्तुत करने पर सहमति जताई। सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि अगली एचपीसी बैठक एक महीने के भीतर बुलाई जा सकती है, जिससे व्यापक परामर्श को दर्शाने वाला दस्तावेज तैयार करने की आवश्यकता और बढ़ गई है।
विवाद तब और गहरा गया जब जंस्कार बुद्धिस्ट एसोसिएशन ने 20 जनवरी 2026 को केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को पत्र लिखकर एपेक्स बॉडी और केडीए द्वारा उठाई गई राज्य की मांग का कड़ा विरोध जताया। संगठन ने कहा कि वह इन दोनों संस्थाओं के गठन के समय से ही इस मांग का लगातार विरोध करता आया है।