गुलमर्ग (बारामुला)। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में गंडोला में तकनीकी खराबी के कारण हवा में फंसे 320 पर्यटकों को बचाने में सेना के हाई एल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल (हॉज) ने सबसे मुश्किल हालात अद्वितीय नेतृत्व और साहस का परिचय दिया। हॉज की टीम ने गंडोला बेस पर उस जगह मोर्चा संभाला जहां जमीन और केबल कारों के बीच ऊंचाई सबसे ज्यादा थी। इन बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जवानों ने न सिर्फ पर्यटकों को हिम्मत दी बल्कि रिकॉर्ड समय में सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
सोमवार को गंडोला सेवा ठप होने की सूचना मिलते ही हॉज के कमांडेंट मेजर जनरल पुनीत डोवाल अपनी विशेष टीमों के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए थे। उन्होंने सेना की 19वीं डिवीजन और नागरिक प्रशासन के साथ तालमेल बिठाकर मौके पर ही कंट्रोल सेंटर खोल लिया ताकि सेना, हॉज, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस के प्रयासों में समन्वय बनाकर साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा सके।
इस बचाव अभियान को दो-सूत्री रणनीति के तहत चलाया गया। पहले मोर्चे के लिए चिह्नित टीमें फेज-1 से नीचे की ओर बढ़ीं। दूसरे मोर्चे पर अन्य टीमें गंडोला बेस स्टेशन से ऊपर की ओर रवाना हुईं। हॉज की टीम ने गंडोला बेस पर मोर्चा संभाला और बचाव टीमों को अलग-अलग केबिन सौंपी गईं। इस समन्वय से 65 केबिनों में फंसे 312 पर्यटकों को रिकॉर्ड समय में तेजी से सुरक्षित निकाला जा सका।
मॉक ड्रिल आई काम...गर्भवती महिला का सुरक्षित रेस्क्यू
हॉज ने हाल ही में गुलमर्ग विकास प्राधिकरण के साथ ऐसी ही एक आपात स्थिति से निपटने के लिए मॉक ड्रिल की थी। ये माॅक ड्रिल गुलमर्ग में वास्तविक संकट में बेहद मददगार साबित हुई। अभियान के दौरान मेजर जनरल पुनीत डोवाल ने खुद आगे रहकर कमान संभाली और हवा में फंसे पर्यटकों का लगातार ढांढस बंधाया। इसी दौरान सेना के जांबाज अधिकारियों ने एक गर्भवती महिला को भी सुरक्षित निकाला। समय रहते प्रभावी तालमेल के कारण यह अभियान अंधेरा होने से पहले पूरा हो गया। पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने अभियान में शामिल हॉज की टीमों और अन्य सभी बचाव एजेंसियों द्वारा प्रदर्शित पेशेवर रवैये, समर्पण और मानवीय भावना की जमकर सराहना की।