श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर में पिछले दो वर्षों में मानव-जानवर संघर्ष के चौंका देने वाले आंकड़ें सामने आए हैं। वन्यजीव विभाग के अनुसार पिछले दो सालों में 15,600 से ज़्यादा मामले सामने आए जिनमें कई मौतें हुईं और कई घायल हुए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 के बीच केंद्र शासित प्रदेश में मानव-जानवर संघर्ष के 9,301 मामले सामने आए। इन घटनाओं में 137 लोग घायल हुए और 18 लोगों की जान चली गई। जम्मू जिले में सबसे ज़्यादा 1,444 मामले सामने आए। हालांकि इस दौरान जिले में किसी के घायल होने या मौत होने की कोई खबर नहीं आई।
कुपवाड़ा में 1,173 मामले दर्ज किए गए और सबसे ज़्यादा चार मौतें हुईं जबकि जिले में 23 लोग घायल भी हुए। डोडा में 826 मामले दर्ज हुए जिनमें 3 मौतें हुईं। अनंतनाग में 667 मामले दर्ज हुए जिनमें 3 मौतें हुई जबकि 11 घायल हुए। बारामुला में 950 मामले दर्ज हुए जिनमें 2 मौतें हुई। बांदीपोरा में 750 मामले दर्ज हुए जिनमें 2 मौतें हुईं जबकि 9 घायल हुए। उधमपुर में 230 मामले दर्ज हुए जिसमें एक मौत हुई। किश्तवाड़ में 998 मामले दर्ज हुए जिसमें एक मौत हुई। पुंछ में 70 मामले दर्ज हुए जिसमें एक मौत हुई। रामबन में 756 मामले दर्ज किये गए जिसमें 15 घायल हुए। पुलवामा में 367 मामले दर्ज हुए जिसमें 12 लोग घायल हुए। शोपियां में 224 मामले दर्ज हुए जिसमें 10 लोग घायल हुए। कठुआ में 190 मामले दर्ज हुए। राजोरी में 110 और रियासी में 15 मामले दर्ज हुए जबकि सांबा में कोई मामला सामने नहीं आया।
2024-25 के केवल 6,360 मामले ही रिपोर्ट हुए हैं जिसमें 213 लोग घायल हुए और 14 मौतें हुईं। जम्मू जिले में फिर से सबसे ज़्यादा 1,341 मामले रिपोर्ट हुए। अनंतनाग में 637, रामबन में 686, किश्तवाड़ में 673 और डोडा में 609 मामले रिपोर्ट हुए।
आंकड़ों के अनुसार कुपवाड़ा में 3 मौतें हुईं जबकि डोडा में 3 और अनंतनाग में 2 मौतें हुईं। पुलवामा में एक मौत और 30 लोग घायल हुए। पुंछ में एक की मौत और 25 लोग घायल हुए। विभाग ने आगे बताया कि जम्मू क्षेत्र में प्रभावित लोगों की उम्र 15 से 60 साल के बीच है जबकि कश्मीर क्षेत्र में यह 4 से 70 साल के बीच है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि मानव बस्तियों का जानवरों के अधिकार क्षेत्र में बनना एक बड़ा कारण है।
वन्यजीव विशेषज्ञ बशीर अहमद ने कहा कि अगर श्रीनगर शहर की बात करें तो हारवन, निशात, शालीमार समेत अन्य कई इलाकों में निर्माण जंगल क्षेत्र की ओर बढ़ता जा रहा है। अगर इंसान ही जानवरों के इलाकों में घुसपैठ कर रहा है तो जानवरों को खाने-पीने के लिए दिक्कत आ रही है क्योंकि उसका ईको सिस्टम बिगड़ रहा है। यही कारण है कि मानव-जानवर संघर्ष के मामलों में बढ़ोतरी आ रही है। ऐसा ही हाल जम्मू कश्मीर के अन्य इलाकों का भी है।