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Srinagar News: अनंतनाग में लश्कर के दो आतंकियों के घर ध्वस्त

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अनंतनाग हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बिजबेहरा में सक्रिय उग्रवादी हारून गनी के रिहायशी घर को गिर
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-अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी की टारगेट किलिंग के बाद वीरवार को प्रशासन और सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई
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अमर उजाला ब्यूरो/संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर/अनंतनाग। अनंतनाग के लाल चाैक पर अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात पुलिस हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की टारगेट किलिंग के महज 24 घंटे के भीतर प्रशासन व सुरक्षाबलों ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। वीरवार को सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-ताइबा के दो खूंखार आतंकियों के घरों को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। सुरक्षाबलों की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि घाटी में टारगेट किलिंग को अंजाम देने वाले आतंकियों और उनके मददगारों को बख्शा नहीं जाएगा।
वीरवार सुबह सुरक्षाबल व प्रशासनिक अधिकारी आतंकियों के घर पहुंचे। देखते ही देखते दोनों आतंकियों के अवैध निर्माणों और घरों को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के तहत पहला निशाना बिजबिहाड़ा के गुरी गांव निवासी लश्कर-ए-ताइबा के आतंकी आदिल अहमद ठोकर का नवनिर्मित मकान बना। सुरक्षाबल अप्रैल 2025 में ही आदिल का पुश्तैनी घर ध्वस्त कर चुके हैं। इसके पहले की कार्रवाई में बिजबिहाड़ा के हसनपोरा तवेला के रहने वाले आतंकी हारून रशीद गनई के एक मंजिला मकान को बुधवार रात गिरा दिया गया।
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हारून वर्ष 2018 से लश्कर-ए-ताइबा का सक्रिय आतंकी है। अधिकारियों ने बताया कि ये कार्रवाई आतंकियों और उनके छिपने के बुनियादी ढांचे के खिलाफ बड़े अभियान का हिस्सा है। आतंकियों को सहयोग और शरण देने वालों को अब छोड़ा नहीं जाएगा।

वैध दस्तावेज से पाकिस्तान गया था आदिल
आदिल हुसैन ठोकर लश्कर का कुख्यात आतंकी है। सुरक्षाबलों और एनआईए ने पहलगाम आतंकी हमले की शुरुआती जांच में मुख्य साजिशकर्ताओं और मुख्य हत्यारे के रूप में उसे चिह्नित किया था। उस पर सीमा पार बैठे अपने आकाओं के इशारे पर स्वचालित हथियारों से पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने का आरोप है। वह वर्ष 2018 में घर से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हुआ था। तब उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं था। इसका फायदा उठाकर उसने पासपोर्ट बनवाया और वैध यात्रा दस्तावेज के जरिए पाकिस्तान चला गया। सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद खुफिया जानकारी के मुताबिक वह करीब सात साल पाकिस्तान में रहा। वहां उसने पाकिस्तानी सेना की निगरानी में लंबा प्रशिक्षण लिया और आतंकी बन गया। वह पहलगाम हमले से कुछ समय पहले ही गुप्त रूप से कश्मीर लौटा था।

2018 में पीओके गया था हारून
अनंतनाग जिले के हसनपोरा अरवानी निवासी हारून रशीद गनई हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर से जुड़ा रहा है। वह वर्ष 2018 में पीओके भाग गया था और वहां आतंकी नेटवर्क से जुड़ गया। जून 2021 में उसके दक्षिण कश्मीर में लौटने और सक्रिय होने की रिपोर्ट सामने आई थी। मार्च 2025 में प्रशासन ने उसकी संपत्ति पर कार्रवाई की थी।
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पहलगाम हमले के बाद आतंक पर यूं हुआ प्रहार
-आदिल हुसैन ठोकर (लश्कर) : बिजबिहाड़ा में घर को आईईडी से उड़ाया गया। बायसरन (पहलगाम) हमले के षड्यंत्र में उसकी बड़ी भूमिका सामने आई थी।
-आसिफ शेख (लश्कर): पुलवामा के त्राल में उसके घर को बुलडोजर से तोड़ दिया गया।
-शाहिद अहमद कुट्टे (लश्कर): शोपियां के चोटीपोरा स्थित घर ध्वस्त किया गया।
-अहसान उल हक (लश्कर) : पुलवामा के मुरन इलाके में मकान को विस्फोट में नष्ट किया गया।
-आमिर नजीर वानी (जैश): त्राल के खसीपोरा गांव में स्थित घर तोड़ा गया।
-जाहिद अहमद: कुलगाम के मतलम इलाके में स्थित घर को ध्वस्त किया गया।
-हारिस अहमद: पुलवामा के काचीपोरा इलाके में बने घर को विस्फोट से उड़ा दिया गया।
-जाकिर अहमद गनई (लश्कर), आमिर अहमद डार (लश्कर), जमील अहमद शेर गोजरी (जैश), अदनान शफी डार (टीआरएफ) और फारूक अहमद तेंदुआ (टीआरएफ) के घरों को भी गिराया गया।

अनंतनाग हमले के बाद सुरक्षा बलों ने बिजबेहरा में सक्रिय उग्रवादी हारून गनी के रिहायशी घर को गिर

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