श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बाजारों में ईद-उल-अजहा से पहले आम दिनों जैसी रौनक नहीं दिखी। व्यापारियों का कहना है कि बिक्री में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट आई है।व्यापारियों ने बताया कि लाल चौक जो श्रीनगर का मुख्य व्यापारिक केंद्र है और उसके आस-पास के बाजारों में बिक्री बहुत धीमी रही क्योंकि ईद की खरीदारी से जुड़ी वह चहल-पहल नदारद थी। उन्होंने दावा किया कि कुल बिक्री में लगभग 60 प्रतिशत की कमी आई है।
लाल चौक ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सुहैल शाह ने बताया कि बिक्री बहुत धीमी है और बाजार की हालत वैसी नहीं है जैसी पहले हुआ करती थी। इसमें लगभग 60-70 प्रतिशत की गिरावट आई है। ईद से पहले बाजार का माहौल आम दिनों जैसा ही लग रहा था। बाजारों में खासकर बेकरी, मिठाई, रेडीमेड कपड़े और क्रॉकरी की दुकानों पर जहां ईद से पहले ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती थी। इस बार बिक्री बहुत धीमी रही। शाह ने बताया कि बाजार की बिक्री मुख्य रूप से सरकारी कर्मचारियों और वेतनभोगी वर्ग पर निर्भर करती है लेकिन सरकार ने इस त्योहार से पहले कर्मचारियों का वेतन जारी नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि आमतौर पर वेतनभोगी वर्ग ही बाजार को गति देता है। दुर्भाग्य से सरकारी कर्मचारियों का वेतन अब तक जारी नहीं किया गया है जो व्यापारिक समुदाय के लिए एक बड़ा झटका है। पिछले सालों की तुलना में इस साल कुर्बानी के जानवरों की बिक्री भी कम रही। पैगंबर इब्राहिम की परंपरा को निभाने के लिए करोड़ों रुपये की भेड़ें और बकरियां कुर्बान की जाती हैं। इस परंपरा के अनुसार पैगंबर इब्राहिम ने अल्लाह के प्रति अपनी आज्ञाकारिता दिखाने के लिए अपने इकलौते बेटे पैगंबर इस्माइल की कुर्बानी देने की पेशकश की थी।
एक ग्राहक यावर शफी ने कहा कि इस बार कुर्बानी के जानवरों की कीमतें बहुत ज्यादा हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो गई है। लोग दुनिया भर में चल रही मौजूदा आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंतित हैं और इसी वजह से बाजार में ज्यादा हलचल नहीं दिख रही है। इस बीच घाटी के अन्य जिला मुख्यालयों में भी ऐसे ही हालात देखने को मिले हैं।