श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता सुनील शर्मा ने बुधवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए तीखा हमला बोला। लाल चौक स्थित ऐतिहासिक घंटाघर पर कश्मीर संभाग भर से जुटे कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने उमर अब्दुल्ला पर जनता की समस्याओं से बेखबर होकर ''''शहजादे'''' जैसी विलासिता भरी जिंदगी जीने का सीधा आरोप लगाया। यह विशाल जनसभा बुनियादी जनसमस्याओं और सरकार की कथित नाकामियों के विरोध में बुलाए गए नागरिक सचिवालय घेराव मार्च से ठीक पहले आयोजित की गई थी।
भाजपा के प्रस्तावित नागरिक सचिवालय घेराव मार्च को देखते हुए पूरे लाल चौक इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सचिवालय की ओर जाने वाली हरि सिंह हाई स्ट्रीट सड़क को बंद कर दिया गया था और चप्पे-चप्पे पर भारी संख्या में पुलिस व अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया था। इस दौरान घंटाघर के पास पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि जनता में भारी गुस्सा है और सड़कों पर उतरती यह भीड़ सीधे तौर पर नेकां सरकार की विफलता का आईना है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज बिजली, पानी, सड़क और नौकरियों के लिए तरस रहे हैं, खासकर नौजवान, वे अब सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
कार्यकर्ताओं के भारी हुजूम के बीच गरजते हुए सुनील शर्मा ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर की जनता बिजली कटौती, पीने के पानी की किल्लत, खस्ताहाल सड़कों और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी से कराह रही है, लेकिन सरकार पूरी तरह नदारद है। मुख्यमंत्री पर निजी और राजनीतिक हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने उमर अब्दुल्ला को इसलिए नहीं चुना था कि वे एक शहजादे की जिंदगी बिताएं, कभी गुलमर्ग तो कभी पहलगाम में स्कीइंग करें या फिर मैराथन में निक्कर पहनकर दौड़ें। शर्मा ने कहा कि जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है और राज्य के मुखिया सैर-सपाटे में मशगूल हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने अब्दुल्ला परिवार पर पीढ़ियों से झूठी कसमें खाकर लोगों को गुमराह करने का आरोप मढ़ा। उन्होंने सवाल दागा कि चुनाव से पहले हर परिवार को 200 यूनिट मुफ्त बिजली, 10 किलो मुफ्त राशन और छह महीने में एक लाख युवाओं को रोजगार देने के बड़े-बड़े वादों का क्या हुआ। उन्होंने याद दिलाया कि उमर अब्दुल्ला ने तथाकथित अनुच्छेद 370 की बहाली का भी सब्जबाग दिखाया था। उन्होंने कटाक्ष किया कि केंद्र की मोदी सरकार सोलर पैनल पर भारी सब्सिडी दे रही है, जिसे उमर सरकार अपनी कामयाबी बताकर जनता को ठगने का काम कर रही है।
सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि नेकां सरकार युवाओं को पर्याप्त रोजगार देने में पूरी तरह नाकाम रही है और सरकारी भर्तियों को दरकिनार कर दिया गया है। नौजवानों को यह बता दिया गया है कि अब उन्हें पीएससी या एसएसआरबी के जरिए नौकरियां नहीं मिलेंगी, बल्कि नौकरियों को नेशनल कॉन्फ्रेंस से जुड़े ठेकेदारों के हवाले कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नेकां सरकार ने विज्ञापित किए बिना 25,000 सरकारी पदों को आउटसोर्सिंग के नाम पर ठेकेदारों के मार्फत अपने चहेते कार्यकर्ताओं और रिश्तेदारों में बेच दिया है, जिससे गरीब और मेहनती नौजवानों का हक हमेशा के लिए छीन लिया गया। आज हालत यह है कि अगर किसी अस्पताल में डॉक्टर भी तैनात करना हो तो वह भी नेकां के ठेकेदार के जरिए तय हो रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बिजली की दरों में की गई हालिया बढ़ोतरी को लेकर भी सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि इस टैरिफ हाइक ने गरीब जनता की कमर तोड़ दी है और अतिरिक्त आर्थिक बोझ लाद दिया है।
फारूक अब्दुल्ला के पंचायती राज चुनावों से जुड़े बयानों पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि ''''रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया'''' वाली सामंती मानसिकता अब घाटी में नहीं चलने वाली है। उन्होंने दो टूक कहा कि भाजपा पंचायतों के चुनाव करवा कर ही दम लेगी। वहीं राज्य के दर्जे के सवाल पर उन्होंने मुख्यमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उमर अब्दुल्ला में जरा भी गैरत और मर्यादा बची है तो वे गांदरबल विधानसभा सीट से इस्तीफा दें और सिर्फ स्टेटहुड के मुद्दे पर जनता के बीच जाकर ताजा चुनाव लड़कर दिखाएं अगर जनता उन्हें जिताकर भेजती है तो भाजपा उनके आगे सिर झुका लेगी। उन्होंने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर की अवाम जानती है कि राज्य का दर्जा केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही बहाल कर सकते हैं।
शर्मा ने स्पष्ट किया कि भाजपा नौकरियों की इस कथित खुली लूट, पंचायती चुनाव न कराने की साजिश, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और बिजली की बढ़ी दरों के खिलाफ मैदान में उतरी है। घंटाघर पर इस आक्रामक संबोधन और शक्ति प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता व कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकजुट रहे और इसके बाद उन्होंने नागरिक सचिवालय की ओर मार्च किया।