बोले-हजारों बागवान परिवारों की आजीविका बचाने के लिए मजबूत सिंचाई व्यवस्था जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
शोपियां। कश्मीर के फल का कटोरा शोपियां में बागवान लगातार बढ़ रही गर्मी को लेकर चिंतित हैं। बागवानों ने सरकार से अपील की है कि क्षेत्र के बागवानी क्षेत्र को बचाने के लिए सिंचाई ढांचे को मजबूत किया जाए। शोपियां प्रदेश के प्रमुख सेब उत्पादक जिलों में से एक है। यहां का सेब देशभर की मंडियों में जाता है और हजारों परिवारों की आय का मुख्य स्रोत है।
बागवानों का कहना है कि जुलाई में गर्मी का लंबा दौर सेब की बढ़ोतरी और विकास को प्रभावित करने लगा है, जिससे इस उद्योग की दीर्घकालिक स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय बागवानों के अनुसार, इस साल फसल कुल मिलाकर अच्छी दिख रही है और उत्पादन भी संतोषजनक रहने की उम्मीद है लेकिन अत्यधिक गर्मी के कारण फल की प्राकृतिक बढ़ोतरी धीमी हो गई है। किसानों का मानना है कि लगातार शुष्क मौसम और बागों में नमी की कमी के कारण सेब अपेक्षित आकार नहीं ले पा रहे हैं।
स्थानीय बागवान माशूक अहमद मीर ने कहा कि मौजूदा मौसम में बागवानों को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बार सिंचाई करनी पड़ रही है ताकि फल का सही विकास हो और सेब के पेड़ स्वस्थ रहें। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक बारिश अपर्याप्त होने के कारण सिंचाई अब जरूरी हो गई है। मीर ने पिछले कुछ वर्षों में पानी की उपलब्धता में गिरावट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बारिश काफी कम हुई है और ग्लेशियरों के पिघलने से आने वाले नालों का पानी भी धीरे-धीरे घट रहा है। इसके चलते कई किसानों को फल विकास के अहम चरण में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी जुटाने में दिक्कत हो रही है।
बदलते मौसम पैटर्न पर चिंता जताते हुए मीर ने सरकार से जलवायु परिवर्तन के असर से बागवानी क्षेत्र की रक्षा के लिए दीर्घकालिक उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार शोपियां और अन्य सेब उत्पादक क्षेत्रों के हजारों बागवान परिवारों की आजीविका बचाना चाहती है तो सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करना प्राथमिकता बननी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हर गांव या बागवानी क्षेत्र में बोरवेल और आधुनिक सिंचाई प्रणाली स्थापित की जाए ताकि सूखे के दौरान पानी का भरोसेमंद स्रोत मिल सके। इससे किसानों की बारिश और मौसमी जल स्रोतों पर निर्भरता कम होगी।
मीर ने कहा कि जिस तरह बागवानी विभाग और एचएडीपी के तहत उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की मदद के लिए कई पहलें हो रही हैं, उसी तरह भरोसेमंद सिंचाई सुविधाओं पर भी उतना ही जोर दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, पर्याप्त पानी के बिना उन्नत पौध सामग्री, वैज्ञानिक बाग प्रबंधन और अन्य सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। बागवानों ने आशंका जताई कि अगर आने वाले वर्षों में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा और सिंचाई ढांचे में सुधार नहीं हुआ तो क्षेत्र के बागवानी उद्योग को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है।