तीन साल का चक्र, डिजिटल मॉनिटरिंग पोर्टल और दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट लागू होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार को पुनर्वास और सामाजिक-आर्थिक पुन: एकीकरण योजना 2026 की समीक्षा के लिए बैठक की अध्यक्षता की। योजना का उद्देश्य नशे की लत से उबर रहे लोगों के लिए समग्र और समन्वित पुनर्वास ढांचा तैयार करना है।
बैठक में मुख्य सचिव अटल डुल्लू, प्रिंसिपल सेक्रेटरी गृह चंद्राकर भारती, एलजी के प्रिंसिपल सेक्रेटरी डॉ. मंदीप के भंडारी और सोशल वेलफेयर कमिश्नर सेक्रेटरी सरमद हफीज सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। कमिश्नर सेक्रेटरी सोशल वेलफेयर सरमद हफीज ने योजना की मुख्य बातें पेश कीं।
योजना को प्रिंसिपल सेक्रेटरी गृह की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स ने तैयार किया है। एलजी ने कहा कि पुनर्वास ढांचा समन्वित, मानवीय और परिणाम-उन्मुख होना चाहिए। इसमें निरंतर रिकवरी, सामाजिक समावेश और आजीविका के अवसर जरूरी हैं। एलजी ने जोर दिया कि समुदाय की भागीदारी, परिवार का सहयोग, स्किल डेवलपमेंट और निरंतर निगरानी पुनर्वास की बुनियाद हों। योजना का पायलट प्रोजेक्ट कार्यान्वयन पहले कश्मीर और जम्मू डिवीजन के 2 सबसे प्रभावित जिलों में शुरू होगा।
नतीजों का आकलन कर इसे पूरे यूटी में लागू किया जाएगा। एलजी ने निर्देश दिए कि प्रतिबद्ध अधिकारी चिन्हित किए जाएं। साथ ही प्रेरित महिला स्वयंसेवकों समूहों को प्रशिक्षण देकर काउंसलिंग और पुनर्वास में शामिल किया जाए। पारदर्शी निगरानी और साक्ष्य-आधारित निर्णय के लिए तकनीक का उपयोग हो।