संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) ने डाक विभाग को निर्देश दिया है कि वह गांदरबल की 72 वर्षीय दिव्यांग और अविवाहित महिला के फैमिली पेंशन क्लेम पेंशन दोबारा शुरू करने की मांग पर छह सप्ताह के भीतर फिर से विचार करे। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह मामला मानवीय आधार पर भी विचार किए जाने लायक है।
यह आदेश मेंबर (ज्यूडिशियल) एमएस लतीफ ने जरीफा बानो की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। जरीफा बानो डाक विभाग में मेल ओवरसियर रहे अब्दुल जब्बार वानी की बेटी हैं, जिनका निधन नौकरी के दौरान हो गया था। याचिकाकर्ता ने फैमिली पेंशन दोबारा शुरू करने के अपने क्लेम को खारिज किए जाने को चुनौती दी थी और ब्याज सहित बकाया राशि जारी करने की मांग की थी।
याचिका के अनुसार, पिता की मृत्यु के बाद जरीफा बानो को शुरू में अविवाहित बेटी के तौर पर फैमिली पेंशन मंजूर की गई थी। हालांकि, जब उन्हें एक्स्ट्रा डिपार्टमेंटल डाक एजेंट और बाद में ग्रामीण डाक सेवक ब्रांच पोस्ट मास्टर के तौर पर काम पर रखा गया तो पेंशन बंद कर दी गई। वह 65 साल की उम्र में मार्च 2018 में इस पद से रिटायर हुईं लेकिन जीडीएस कर्मचारी होने के नाते उन्हें पेंशन से जुड़ा कोई लाभ नहीं मिला।
याचिकाकर्ता ने बताया कि वह रूमैटिक हार्ट डिजीज से पीड़ित हैं और उनकी ओपन-हार्ट सर्जरी भी हो चुकी है। स्किम्स के मेडिकल रिकॉर्ड से पता चला कि वह 1979 से इस बीमारी से पीड़ित हैं और डॉक्टरों ने उन्हें शादी न करने की सलाह दी थी क्योंकि इससे उनकी जान को खतरा हो सकता था। उन्होंने तर्क दिया कि काम करने में असमर्थ व अविवाहित होने और रिटायरमेंट के बाद आजीविका का कोई स्वतंत्र साधन न होने के कारण वह सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 के नियम 54 (6) के तहत फैमिली पेंशन दोबारा पाने की हकदार हैं।
डाक विभाग ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने 1988 से 2018 तक लगभग तीन दशकों तक जीडीएस के तौर पर काम करके अपनी आजीविका कमाई है, इसलिए अविवाहित और दिव्यांग बेटियों पर लागू होने वाले पेंशन नियमों के तहत उनकी पात्रता खत्म हो गई है।