श्रीनगर। जिले की एक अदालत ने नाबालिग को गाड़ी चलाने देने के लिए एक व्यक्ति को तीन साल की साधारण कैद की सज़ा सुनाई है। हालांकि ''''प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट'''' के तहत सजा को रोक दिया। अदालत ने माना कि पहली बार अपराध करने वाले व्यक्ति को सुधरने का मौका देने से न्याय का मकसद पूरा होगा।
स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट शब्बीर अहमद मलिक की अदालत ने यह आदेश तब दिया जब श्रीनगर के फतेह कदल के रहने वाले हारून खान ने नाबालिग को अपनी गाड़ी चलाने देने का अपराध स्वीकार कर लिया। यह मामला तब सामने आया जब श्रीनगर ट्रैफ़िक पुलिस ने गाड़ी चला रहे एक नाबालिग को रोका। इसके बाद, गाड़ी के रजिस्टर्ड मालिक खान के ख़िलाफ़ चालान पेश किया गया।
अदालत ने कहा कि जब कोई नाबालिग अपराध करता है तो ऐसे नाबालिग के अभिभावक या मोटर गाड़ी के मालिक को दोषी माना जाएगा और उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी और उसी के अनुसार सज़ा दी जाएगी।
सुनवाई के दौरान खान ने आरोपों का विरोध नहीं किया और अपनी मर्ज़ी से अपराध स्वीकार कर लिया। इस स्वीकारोक्ति को दर्ज करते हुए मजिस्ट्रेट ने कहा कि अब ट्रायल (मुकदमे) को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है।