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Srinagar News: श्रीनगर में लगा साहित्यकारों का मेला, इतिहास और संस्कृति पर हुई चर्चा

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श्रीनगर। डल झील किनारे शेर ए कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शनिवार को दो दिवसीय कश्मीर लिटरेचर फेस्टिवल का आगाज मंच पर दीप जलाकर और कश्मीरी कहावत से हुआ। कार्यक्रम के पहले दिन इतिहास और संस्कृति पर चर्चा हुई।
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कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने साहित्यकारों, लेखकों और प्रबुद्ध जनों को संबोधित किया। इस भव्य समारोह में आर्मी के लेफ्टिनेंट जनरल एडी पांडे, फेस्टिवल के आयोजक युवराज श्रीवास्तव, दीपक वोहरा, संस्थान के सदस्य और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित भारी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उपराज्यपाल ने बाहर से आए सभी अतिथियों का कश्मीरी परंपरा के अनुसार स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में एक कहावत है, मेहमान छु खुदाई मन्ज सद्या, अर्थात मेहमान भगवान का रूप होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस दो दिवसीय महोत्सव में हिस्सा लेने वाले लोग कश्मीर की इस खूबसूरत भावना को महसूस करेंगे।
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उपराज्यपाल ने साहित्य के महत्व को संस्कृतियों और पीढ़ियों के बीच एक सेतु के रूप में रेखांकित किया और संवाद, रचनात्मकता तथा सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने लेखकों, विद्वानों, कलाकारों और पाठकों को सार्थक चर्चाओं में शामिल होने तथा इस क्षेत्र की साहित्यिक परंपराओं का उत्सव मनाने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मौजूद अतिथियों का सम्मान भी किया गया। आयोजकों ने बताया कि महोत्सव के तीसरे संस्करण में पूरे देश से प्रमुख लेखकों, विचारकों, कलाकारों और छात्रों की भागीदारी देखने की उम्मीद है, जिससे साहित्यिक और सांस्कृतिक विमर्श के एक जीवंत केंद्र के रूप में कश्मीर की स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। इसका समापन रविवार को होगा।

हर भारतीय का सपना है विकसित भारत : रूबल नागी
श्रीनगर में आयोजित कश्मीर लिटरेचर फेस्टिवल के तीसरे संस्करण में सामाजिक कार्यकर्ता रूबल नागी ने भी शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने समाज सेवा, बच्चों की शिक्षा और महिला सशक्तीकरण को लेकर अपने विचार साझा किए। रूबल नागी ने अपने संबोधन की शुरुआत उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और कश्मीर लिटरेचर फेस्टिवल की टीम को धन्यवाद देकर की। रूबल नागी ने अपनी संस्था ''''रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन'''' के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी संस्था मुख्य रूप से दो बड़े क्षेत्रों पर काम कर रही है। देश का कोई भी बच्चा चाहे वह बॉर्डर पर रहता हो, झुग्गी-झोपड़ियों में हो या किसी भी क्षेत्र में, शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार है। देश की हर महिला और बेटी को सशक्त होने का पूरा अधिकार है। वास्तविक सशक्तीकरण तब आता है जब महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र होती हैं। जब उनके पास कमाई का जरिया होता है वे अपने पैरों पर खड़ी होती हैं और उन्हें अपने पैसे को अपनी मर्जी से खर्च करने का अधिकार मिलता है। अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री के ''''विकसित भारत'''' के सपने का जिक्र करते हुए कहा कि आज यह सपना सिर्फ प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि हर एक भारतीय का सपना बन चुका है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे अपने आसपास के वंचित बच्चों की मदद करें और उन्हें शिक्षा से जोड़ें।

कश्मीर धरती की जन्नत है, यहां पर्यटकों को आने से कोई नहीं रोक सकता
कश्मीर लिटरेचर फेस्टिवल में पूर्व भारतीय राजनयिक दीपक वोहरा ने कश्मीर को लेकर अपना गहरा लगाव साझा किया। उन्होंने बताया कि यह उनका इस फेस्टिवल में पहला दौरा है लेकिन श्रीनगर की यह उनकी 10वीं या 12वीं यात्रा है। मैं जब भी यहां आता हूं, मुझे हर बार यहां तरक्की और विकास देखने को मिलता है। लिटरेचर फेस्टिवल के माध्यम से मुझे लोगों के विचार सुनने का मौका मिलता है। वहीं जब मैं लाल चौक, डल झील या यहां के खूबसूरत बागों में घूमता हूं तो मुझे लोगों में एक अलग ही जुनून, खुशी और भविष्य के लिए भारी उत्साह दिखाई देता है। जैसे ही यह संदेश बाहर जाएगा कि यहां सफलतापूर्वक लिटरेचर फेस्टिवल जैसे बड़े आयोजन हो रहे हैं, लोग फिर से बड़ी संख्या में खिंचे चले आएंगे। मेरी बात मान लीजिए कोई रोक नहीं सकेगा। यह जगह ''''जन्नत'''' है और इस धरती की जन्नत में हर कोई आना चाहता है। इसलिए पर्यटकों को लेकर चिंता करने की कोई बात नहीं है, सब यहां वापस लौटेंगे।
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