बांदीपोरा। वर्षों के जीर्णोद्धार के बाद कश्मीर की वुलर झील के कुछ हिस्सों में कमल की वापसी ने पारिस्थितिक सुधार की उम्मीदें जगाई हैं लेकिन आर्द्रभूमि के किनारे रहने वाले मछुआरों का कहना है कि झील में मछली पकड़ने में तेजी से गिरावट आई है। कुछ ने तो ऐसे दिनों की सूचना दी है जब वे बिना पकड़े लौट आते हैं। वुलर संरक्षण और प्रबंधन प्राधिकरण ने झील की पारिस्थितिक स्थिति में सुधार के उद्देश्य से गाद निकालने और आक्रामक वनस्पति को हटाने सहित जीर्णोद्धार उपाय किए हैं।
मछुआरों का कहना है कि इस सुधार से मछली के भंडार में सुधार नहीं हुआ है। एक बहुत अनुभवी मछुआरे मोहम्मद अशरफ के अनुसार झील के एक बड़े हिस्से के चारों ओर बांधों के निर्माण के कारण झेलम, मधुमती और अरीन नाले जैसे मुख्य संसाधनों का पानी झील के एक निश्चित क्षेत्र में नहीं गिरता है। इससे एक बड़े हिस्से में पानी की कमी हो जाती है और बांध इस अवधि के दौरान मछलियों को विभिन्न क्षेत्रों में जाने की अनुमति नहीं देते हैं।
वुलर संरक्षण कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि मछलियों की आबादी में गिरावट पर अध्ययन फिलहाल जारी है। अधिकारी ने कहा, मछलियों में गिरावट पर अध्ययन चल रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद कारणों की पहचान की जाएगी और उसके अनुसार उचित उपायों पर विचार किया जा सकता है।