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Srinagar News: श्रीनगर में नेकां का प्रदर्शन, पूर्ण राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 की वापसी की मांग

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श्रीनगर। भाजपा की केंद्र सरकार के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बुधवार को प्रदर्शन किया। नेकां ने भाजपा मुख्यालय तक मार्च का ऐलान किया था, जिसकी पुलिस ने इजाजत नहीं दी और नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिंदुन पार्क के पास ही रोक लिया। आगे बढ़ने को लेकर दोनों ओर से धक्कामुक्की हुई, इसके बाद पुलिस से जदीबल विधायक सादिक तनवीर और विधायक हिलाल अकबर लोन को अहतियातन हिरासत में लेकर राजबाग थाने पहुंचा दिया। वहीं प्रदर्शन के दौरान सकीना इत्तू की तबीयत खराब होने पर उन्हें पारस हॉस्पिटल ले जाया गया।
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नेकां के प्रदर्शन और भाजपा मुख्यालय तक मार्च के ऐलान के बाद राजबाग और आसपास के इलाके में बुधवार को सुबह से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था थी। सुबह करीब 9 बजे से गिंदुन पार्क के पास नेकां नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमा होना शुरू हो गया। करीब सवा 10 बजे मंत्री सकीना इत्तू और सादिक तनवीर के आने के बाद नेकां कार्यकर्ताओं ने राजबाग की ओर से बढ़ना शुरू किया तो पुलिस ने वहीं रोक दिया।

भाजपा मुख्यालय की ओर जाने के प्रयास के बाद काफी देर तक नेकां कार्यकर्ताओं और नेताओं की पुलिस से धक्कामुक्की होती रही। इस दौरान मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी भी वहां पहुंच गए और फिर सादिक तनवीर और अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वहीं चौराहे पर धरने पर बैठ गए। इस दौरान मंत्री सकीना इत्तू कार्यकर्ताओं के साथ चौराहे के पास पूर्ण राज्य के दर्जे और अनुच्छेद 370 की वापसी की मांग के लिए नारेबाजी करती रहीं।
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करीब 11 बजे नेकां नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाजपा मुख्यालय की ओर जाने की कोशिश की। धक्कामुक्की के बीच प्रदर्शनकारी राजबाग चौराहे पर लगे बैरियर को पार कर गए, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे एक और बैरियर लगाकर रोक लिया। यहां से पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलना शुरू किया और सादिक तनवीर और हिलाल अकबर लोन को कुछ कार्यकर्ताओं के साथ एहतियातन हिरासत में ले लिया और कुछ पुलिसकर्मी राजबाग थाने में ले गए।

इसके बाद प्रदर्शन कर रहे नेकां नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने समझाकर हटाना शुरू किया। प्रदर्शन में शामिल सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर श्रीनगर के गिंदुन पार्क तक यह संदेश स्पष्ट है, जम्मू-कश्मीर की जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों, रोजगार की सुरक्षा और 5 अगस्त 2019 से पहले की सांविधानिक स्थिति की बहाली के बिना खामोश बैठने वाली नहीं है।

हर मसले का इलाज स्टेटहुड है, मोदी जी अपना वादा पूरा करें : सादिक तनवीर

पुलिस की तरफ से रोके जाने पर नाराजगी जताते हुए पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने दोहरे रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, भाजपा को यहां हर तरह की इजाजत दी जाती है, लेकिन जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता पुरअमन (शांतिपूर्ण) तरीके से आवाज उठाना चाहते हैं तो चारों तरफ से रास्ते बंद कर दिए जाते हैं और बैरिकेड्स लगा दिए जाते हैं। हम बीजेपी दफ्तर के बाहर जाकर सिर्फ उन्हें वही बात याद दिलाना चाहते थे जो प्रधानमंत्री मोदी ने संसद के पटल पर और सुप्रीम कोर्ट के सामने कही थी, यानी जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देना। भाजपा कहती है कि यहां एडमिनिस्ट्रेशन फेल है। मैं उनसे कहता हूं कि इन सभी मुश्किलों का एक ही इलाज है, स्टेटहुड बहाल करना। हमारे नौजवानों के अधिकारों और रिजर्वेशन रैशनलाइजेशन की फाइलें दबा कर रखी गई हैं। केंद्र ने जो वादा हमसे जंतर-मंतर से लेकर यहां तक किया था, उसे पूरा करे। अगर पुलिस हमें रोकेगी, तो भी हम नहीं रुकेंगे। हम आज, कल, परसों, जब भी जरूरत होगी सड़कों पर आएंगे और अपना हक मांगेंगे।

जब तक 2019 से पहले वाले हुकूक नहीं मिलते, संघर्ष जारी रहेगा : सकीना इत्तू
प्रदर्शन के दौरान मंत्री सकीना इत्तू ने भी अनुच्छेद 370 की वापसी के लिए नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने कहा, हम सब पार्टी नेतृत्व, विधायक, मंत्री और कार्यकर्ता यहां इसलिए जमा हुए हैं ताकि दिल्ली के कानों तक अवाम की आवाज पहुंचाई जा सके। चाहे 370 हो, 35ए हो या फिर हमारा स्टेटहुड, यह सब हमारा हक और हमारी सांविधानिक गारंटी है। 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर के लोगों से जो कुछ भी छीना गया, उसे वापस पाने की जद्दोजहद 2019 के बाद से ही लगातार चल रही है। हम तब तक लड़ते रहेंगे, जब तक अपने छीने गए हुकूक और स्पेशल गारंटी वापस हासिल नहीं कर लेते। प्रदर्शन के दौरान धक्कामुक्की के बीच सकीना इत्तू की तबीयत खराब होने पर उन्हें पारस हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।

तीसरे फेज यानी स्टेटहुड को केंद्र ने क्यों अटका कर रखा है : जावेद हसन बेग

बारामुला विधायक जावेद हसन बेग ने संसद और अदालत में दिए गए आश्वासनों का हवाला देते हुए केंद्र पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, सॉलिसिटर जनरल और देश के गृह मंत्री ने फ्लोर ऑफ द हाउस और सुप्रीम कोर्ट के सामने यह बात रखी थी कि जम्मू-कश्मीर को तीन चरणों में सामान्य स्थिति में लाया जाएगा। पहला डीलिमिटेशन, दूसरा चुनाव और तीसरा स्टेटहुड की बहाली। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर आपने दो चरण तो पूरे कर दिए, लेकिन तीसरे चरण यानी राज्य के दर्जे को जानबूझकर लटका रखा है। जम्मू-कश्मीर की अवाम ने उमर अब्दुल्ला सरकार को स्पष्ट जनादेश दिया है लेकिन केंद्र सरकार ने यूटी (केंद्र शासित प्रदेश) का ढांचा बनाए रखकर सारे अधिकार अपने पास रखे हैं और जनता द्वारा चुनी गई सरकार को बेबस करने की कोशिश हो रही है। इतिहास में कभी किसी पूर्ण राज्य को डाउनग्रेड करके यूटी नहीं बनाया गया, यह पहली बार जम्मू-कश्मीर के साथ हुआ। यह हमारी सियासी, कानूनी और बुनियादी स्वायत्तता पर हमला है।
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