श्रीनगर। कृषि विभाग में रहबर-ए जिरात योजना के तहत नियुक्ति के लिए कृषि इंजीनियर भी हकदार हैं। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से जारी दस साल पुराने आदेश को रद्द कर कहा, कृषि स्नातकों की तरह ही कृषि इंजीनियरों को भी रहबर-ए जिरात योजना के तहत नियुक्त किया जाए।
न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी ने कहा, 23 नवंबर 2012 को जारी सरकार का आदेश भेदभाव से प्रेरित एकतरफा फैसला है। यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 की कसौटी पर भी खरा नहीं उतरता। लिहाजा आदेश रद्द किया जाता है। कोर्ट ने कहा, सरकार रहबर-ए जिरात योजना के लिए 6 फरवरी 2007 को जारी आदेश के तहत कृषि स्नातकों की तरह ही कृषि इंजीनियरों को भी नियुक्त करे। याची पक्ष की ओर से बताया गया कि रहबर-ए जिरात योजना में प्रदेश के सभी कृषि स्नातकों को 1500 रुपये के मानदेय पर नियुक्त करने का आदेश जारी किया गया। अधिसूचना में सिर्फ कृषि स्नातक लिखा गया, जबकि कृषि इंजीनियरों का जिक्र तक नहीं हुआ। जम्मू-कश्मीर बेरोजगार डिप्लोमा कृषि इंजीनियर एसोसिएशन ने इस मुद्दे को उठाया, जिस पर तत्कालीन कैबिनेट सब कमेटी ने कृषि इंजीनियरों को कृषि स्नातकों की तर्ज पर लाभ देने की अनुशंसा की, लेकिन वर्ष 2012 में सरकार ने आदेश जारी कर कृषि इंजीनियरों की नियुक्ति का प्रस्ताव रद्द कर दिया। कृषि इंजीनियरों की कुल संख्या 90 थी।