श्रीनगर। कश्मीर घाटी में अक्सर सर्दियों के मौसम में खराब मौसम के बीच उड़ानें कम दृश्यता (विजिबिलिटी) के चलते प्रभावित होती थीं, लेकिन अब घने कोहरे और धुंध के बीच भी उड़ानें प्रभावित नहीं होंगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के श्रीनगर एयरपोर्ट के निदेशक ने बताया कि अप्रैल के महीने से श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कैट-2 आईएलएस सिस्टम को स्थापित करने का काम शुरू होगा। अक्तूबर में इसके शुरू होने की संभावना है। इसके लग जाने से कम दृश्यता में भी उड़ानें लैंड कर सकेंगी।
एएआई के निदेशक कुलदीप सिंह ने कहा कि सभी मापदंडों पर खरा उतरने के लिए यहां डोपलर वैरी हाई फ्रीक्वेंसी ओमनी रेंज (डीवीओआर), नॉन डायरेक्शनल बीकन (एनबीडी), इंस्ट्रूमेंटल लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस), एक्स रे बैगेज इंस्पेक्शन सिस्टम (एक्सबीआईएस), इन लाइन होल्ड बैगेज स्क्रीनिंग (आईएलबीएस) और एस्टीमेट टाइम ऑफ डिपार्चर (ईटीडी) सिस्टम शामिल हैं। कुलदीप सिंह ने कहा कि उपकरणों को संचालित करने के लिए कर्मचारियों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि हवाई अड्डे पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम को 1000 मीटर से अधिक की दृश्यता (विजिबिलिटी) पर कार्य करने के लिए तैयार किया गया है। यदि दृश्यता इस सीमा से कम है तो हम कभी भी उड़ान संचालित नहीं कर पाते हैं। एएआई के निदेशक ने बताया कि एयर फील्ड की कम दृश्यता को दूर करने के लिए हम कैट-2 आईएलएस सिस्टम लगवाने जा रहे हैं। यह सिस्टम अक्तूबर के महीने में चालू हो जाएगा। नई प्रणाली से दृश्यता सीमा 500 मीटर तक बढ़ जाएगी।
नया टर्मिनल भवन और पार्किंग स्टैंड भी बनेगा
निदेशक ने बताया कि हम एयर फील्ड से बर्फ हटाने के लिए आधुनिक मशीनरी का उपयोग करते हैं। हमारा उद्देश्य हमेशा सभी प्रकार के खराब मौसम में उड़ान संचालन में न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित करना है। विमान के पंखों पर बर्फ जमा न होने के लिए डी आइसिंग के लिए वाटर स्प्रे लगाते हैं ताकि उड़ान संचालन में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने बताया कि हम एक नए टर्मिनल भवन और छह और विमान पार्किंग स्टैंड के निर्माण में लगभग 1,500 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं ताकि हम अपने यात्रियों के लिए एक सुखद यात्रा अनुभव सुनिश्चित कर सकें।