चिनार कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने कहा कि घाटी में आतंकवाद से अतिआधुनिक तरीकों से निपटा जा रहा है। ओजीडब्ल्यू पाकिस्तानी नेटवर्क का हिस्सा हैं। घाटी में शांति लाने के लिए उनसे निपटना जरूरी है।
जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से भी खतरनाक हैं ओवर ग्राउंड वर्कर। जो पाकिस्तान के इशारे पर घाटी में भटके हुए युवाओं की आर्थिक मदद कर उनके जरिए हिंसा फैलाते हैं। यह बात यहां आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के पहले दिन मंगलवार को उद्घाटन भाषण में चिनार कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने कही।
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स्थानीय बीबी कैंट में सैन्य कमांडर ने कहा कि घाटी में आतंकवाद से गतिशील तरीकों से निपटा जा रहा है। ओजीडब्ल्यू उस पाकिस्तानी नेटवर्क का हिस्सा हैं घाटी में शांति लाने के लिए जिनसे निपटना जरूरी है। जिससे घाटी में शांति लाने के लिए निपटने की जरूरत है। सेना प्रबंधन अध्ययन बोर्ड (एएमएसबी) द्वारा आयोजित संगोष्ठी का विषय है सहजीवी संबंध:ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और जम्मू-कश्मीर में संघर्षपूर्ण अर्थव्यवस्था।
सेना के अनुसार संगोष्ठी में पहले दिन ओजीडब्ल्यू गठजोड़ पर तीन सत्रों को कवर किया गया। इसमें चिनार कॉर्प्स के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ) सुब्रत साहा (सेवानिवृत्त) और लेफ्टिनेंट जनरल एके भट्ट (सेवानिवृत्त),विशेष डीजी सीआईडी आरआर स्वैन, आईजी कश्मीर विजय कुमार,आईजीपी, कश्मीर के साथ संगोष्ठी में भाग लिया।
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संगोष्ठी दो दिनों में पांच सत्रों में आयोजित की जा रही है और इसमें जम्मू-कश्मीर के भीतर और बाहर के शोधार्थियों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारियों सहित विषय के प्रमुख विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।