श्रीनगर। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में उप राज्यपाल के सलाहकार बसीर खान के जनता दरबार में गैर प्रांतीय अफसरों पर टिप्पणी करने वाले राजनीतिक कार्यकर्ता सोफी को पुलिस ने शांति के लिए खतरा मानते हुए जमानत मिलने के रिहा होने से पहले ही पुन: हिरासत में ले लिया। अब उस पर आईपीसी की धारा107 के तहत कार्रवाई की गई है।
उप राज्यपाल के सलाहकार बसीर खान 10 जून को गांदरबल के मानसबल में दौरे पर गए थे। इस दौरान सोफी ने जनता दरबार में कहा था कि मैं आपसे उम्मीद रखता हूं। चूंकि आप एक कश्मीरी हैं और समझ सकते हैं। मैं आपका गिरेबां भी पकड़ सकता हूं और आपसे जवाब तलब कर सकता हूं। मगर गैर रियासती अफसरों से क्या उम्मीद रख सकता हूं। इस पर जिले की उपायुक्त उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस कृतिका ज्योत्सना ने सोफी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई।
सोफी को उसी रात को पुलिस ने आईपीसी की धारा 153 के तहत तलब कर मामला दर्ज कराया था। बाद में सोफी को स्थानीय अदालत से जमानत मिल गई। इसके बाद भी पुलिस ने उसे रिहा नहीं किया और आईपीसी की धारा 107 के तहत केस दर्ज कर लिया। यह धारा पुलिस को किसी भी व्यक्ति को ‘शांति के लिए खतरा’ होने के कारण प्रिवेंटिव डिटेंशन में रखने का अधिकार देता है।
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गिरफ्तारी ‘बेलगाम’ नौकरशाही शक्तियों का परिणाम : उमर
श्रीनगर। नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर इस मामले में कहा कि एक कश्मीरी राजनीतिक कार्यकर्ता की इस टिप्पणी पर गिरफ्तारी बेलगाम नौकरशाही शक्तियों का परिणाम है। उसने इतना ही कहा था कि उन्हें बाहर के लोगों की बजाय स्थानीय अधिकारियों से अधिक उम्मीदें हैं। उमर ने कहा कि राय व्यक्त करने के बदले में किसी व्यक्ति को जेल भेजा जाना अस्वीकार्य है। सीपीआई (एम) नेता युसूफ तारिगामी ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों का हनन है।