कर्रा बोले- राष्ट्रीय प्रतीकों में विविधता का सम्मान जरूरी
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया पर कहा कि राष्ट्रीय प्रतीक, गीत और परंपराएं हर भारतीय के दिल में विशेष स्थान रखती हैं। उन्होंने कहा कि इनकी असली ताकत देश की विविधता को एकजुट करने में है।
कर्रा ने कहा कि गठबंधन सहयोगी द्वारा वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाना चिंता का विषय है, क्योंकि आजादी के आंदोलन के बाद देश की संवैधानिक यात्रा के दौरान राष्ट्रगीत की भूमिका को लेकर एक संतुलित दृष्टिकोण विकसित हुआ है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद अपनाया गया स्वरूप ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व को बनाए रखते हुए देश के बहुलतावादी स्वरूप और अंतरात्मा की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
मुद्दा देशभक्ति का नहीं, संवैधानिक सोच का है
कर्रा ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल देशभक्ति से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि विविधतापूर्ण गणराज्य में देशभक्ति को किस संवैधानिक भावना के साथ व्यक्त किया जाना चाहिए असली मुद्दा यह है। राष्ट्रीय प्रतीक तभी ज्यादा सम्मान हासिल करते हैं, जब वे भारत की विविधता को अपने भीतर समाहित करें और हर नागरिक को उनमें बराबरी का एहसास हो।