मौलवी इफ्तिखार हुसैन अंसारी को लेकर किए गए दावों को किया खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक अबिद हुसैन अंसारी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया इंटरव्यू का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने मौलवी इफ्तिखार हुसैन अंसारी को लेकर किए गए दावों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अब्दुल्ला परिवार ने बार-बार राजनीतिक हितों को कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं से ऊपर रखा।
सीएम उमर अब्दुल्ला के उस बयान के बाद से विवाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि मौलवी इफ्तिखार हुसैन अंसारी ने उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला से उनकी सरकार गिराने में भूमिका के लिए माफी मांगी थी। आबिद अंसारी ने इस दावे को खुला झूठ बताया। उन्होंने 1990 के दशक के मध्य में जम्मू कश्मीर में निर्वाचित सरकार की बहाली के घटनाक्रम पर भी अपना पक्ष रखा। उन्हाेंने दावा किया कि उस समय प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने मौलवी इफ्तिखार को मुख्यमंत्री बनने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा कर फारूक अब्दुल्ला को लंदन से वापस लाने पर जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक अब्दुल्ला के लौटने के बाद उनसे और हुर्रियत के कुछ नेताओं से केंद्र से आंतरिक स्वायत्तता पर बात करने का आग्रह किया गया था, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे को नहीं उठाया। 1980 के दशक में फारूक सरकार के गिरने और गुलाम मोहम्मद शाह के मुख्यमंत्री बनने पर भी अंसारी ने सफाई दी। उन्होंने सांसद चौधरी रमजान को भी निशाने पर लिया।