संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। बडगाम की एक अदालत ने बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्चा अपने दादा-दादी के साथ रह रहा है। उसे अवैध अभिरक्षा में नहीं रखा गया है। सीजेएम अब्दुल बारी की अदालत ने मां की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। मां ने अपने बेटे को दादा-दादी की अभिरक्षा से वापस लाने के लिए सर्च वारंट जारी करने की मांग की थी।
कोर्ट ने पहले संबंधित थाने के एसएचओ को बच्चे को पेश करने का आदेश दिया था, लेकिन दादा-दादी सुनवाई पर बच्चे को ले गए। कोर्ट ने मां को बच्चे से बातचीत का पर्याप्त समय दिया। इसके बाद भी बच्चे ने मां के साथ जाने से मना कर दिया। कोर्ट ने पाया कि बच्चा सोपोर में पढ़ रहा है। वह दादा-दादी के साथ रहता है। इस पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है मिला, जिससे लगे कि बच्चे को गैरकानूनी तरीके से रोका गया है। कोर्ट ने दादा-दादी को निर्देश दिया कि वे हर शनिवार को मां को बच्चे से मिलने दें। मां को स्कूल के समय के बाद स्कूल परिसर में बच्चे से मिलने की अनुमति दी गई है। संबंधित स्कूल के प्रिंसिपल को आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक कोई भी पक्ष सक्षम गार्डियंस एंड वार्ड्स कोर्ट में नहीं जाता, जिसे बच्चे की अभिरक्षा का अंतिम फैसला लेने का अधिकार है।